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2 साल तक नहीं था कोई खास काम, फिर भी मिलती रही करोड़ों की सैलरी; टेक कर्मचारी की कहानी ने चौंकाया

Tech Employee Salary: एक टेक कर्मचारी ने दावा किया है कि उसे करीब दो साल तक कंपनी में कोई खास काम नहीं मिला लेकिन इस दौरान उसे 5 लाख डॉलर (करीब 4.7 करोड़ रुपये) से ज्यादा सैलरी मिली.

Tech employee's story goes viral

टेक कर्मचारी की कहानी वायरल

अगर कोई आपको बताए कि उसे हर साल करीब 2.6 करोड़ रुपये की सैलरी मिल रही थी, लेकिन उसके पास करने के लिए कोई तय काम नहीं था, तो शायद यह बात सुनकर यकीन करना मुश्किल हो जाए. लेकिन एक टेक कर्मचारी ने ऐसा ही दावा किया है. उसके मुताबिक, उसने लगभग दो साल ऐसे बिताए जब कंपनी से मोटी तनख्वाह मिलती रही, लेकिन जिम्मेदारियां लगभग न के बराबर थीं. इस दौरान उसे 5 लाख डॉलर से अधिक यानी करीब 4.7 करोड़ रुपये का भुगतान मिला.

सोशल मीडिया पर शेयर की अपनी कहानी

इस कर्मचारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपना अनुभव साझा किया. उसने अपनी पोस्ट का शीर्षक रखा, “मुझे लगता है कि मैंने अपनी कंपनी से 5 लाख डॉलर से ज्यादा ले लिए.” पोस्ट में उसने बताया कि वह दुनिया की एक बड़ी टेक कंपनी में करीब 10 वर्षों से काम कर रहा था और इस दौरान पांच अलग-अलग पदों पर अपनी सेवाएं दे चुका था.

प्रमोशन मिला लेकिन उलझ गया मामला

कर्मचारी के अनुसार, वर्ष 2025 की शुरुआत में उसे कंपनी के भीतर एक नई टीम में शामिल होने का अवसर मिला. यह उसके करियर के लिए एक बड़ी उपलब्धि और प्रमोशन जैसा था. लेकिन नई भूमिका शुरू होते ही हालात बदल गए. जिस मैनेजर और डायरेक्टर ने उसे टीम में शामिल कराया था, दोनों कंपनी छोड़कर चले गए. इसके बाद उसकी जिम्मेदारियों को लेकर स्थिति पूरी तरह अस्पष्ट हो गई.

न्यूयॉर्क शिफ्ट हुआ मगर काम नहीं मिला

नई भूमिका के लिए वह अपने परिवार के साथ वेस्ट कोस्ट से न्यूयॉर्क चला गया. उसे भरोसा था कि कुछ समय बाद सब कुछ सामान्य हो जाएगा और काम की स्पष्ट जिम्मेदारियां मिल जाएंगी. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. उसने बताया कि लगभग 2.75 लाख डॉलर सालाना वेतन मिलने के बावजूद उसे कोई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट या स्पष्ट दिशा नहीं दी गई.

शुरुआत में कोशिश की, बाद में छोड़ दी उम्मीद

कर्मचारी ने बताया कि शुरुआती महीनों में उसने खुद पहल करके काम ढूंढने, टीम को समझने और बिजनेस की जरूरतों को जानने की पूरी कोशिश की. लेकिन बार-बार प्रयास करने के बाद भी जब कोई ठोस जिम्मेदारी नहीं मिली, तो उसने धीरे-धीरे प्रयास करना कम कर दिया. उसे लगने लगा कि कंपनी को भी उसकी भूमिका को लेकर कोई स्पष्ट योजना नहीं है.

ऑफिस में Netflix, YouTube और घूमना-फिरना

काम न होने की वजह से उसका दिन अलग ही तरह से गुजरने लगा. वह कई बार ऑफिस के कैफे में बैठकर YouTube वीडियो और Netflix देखता रहता था. कभी न्यूयॉर्क के चर्चित रेस्टोरेंट में खाना खाने निकल जाता तो कभी मैनहैटन की सड़कों पर घूमता रहता था. समय के साथ उसने घर से ज्यादा समय बिताना शुरू कर दिया.

आराम दिखा लेकिन भीतर बढ़ती गई परेशानी

हालांकि बाहर से यह जीवन काफी आरामदायक नजर आता था, लेकिन उसके अनुसार लंबे समय तक बिना किसी लक्ष्य या उद्देश्य के रहना मानसिक रूप से थकाने वाला था. वह कभी जिम चला जाता, कभी खुद के लिए शानदार नाश्ता बनाता और कभी कॉफी लेकर बालकनी में बैठ जाता. फिर भी उसे महसूस होने लगा कि लगातार निष्क्रिय रहना उसके आत्मविश्वास को प्रभावित कर रहा है.

आखिरकार मिली नई जिम्मेदारी

कई महीनों तक इंटरव्यू देने और अलग-अलग अवसर तलाशने के बाद उसे उसी कंपनी के भीतर एक नई भूमिका मिल गई. उसने इसे अपने करियर का महत्वपूर्ण मोड़ बताया. हालांकि लगभग दो वर्षों तक सीमित काम करने के बाद नई जिम्मेदारियां निभाना उसके लिए आसान नहीं था.

खुद को महसूस किया पीछे

नई भूमिका शुरू हुए सिर्फ डेढ़ सप्ताह ही हुआ था, लेकिन उसे लगने लगा था कि उसकी कार्यक्षमता पहले जैसी नहीं रही. उसने माना कि वह अपने साथियों की तुलना में काफी पीछे महसूस कर रहा था. लगातार सक्रिय काम से दूर रहने का असर उसकी पेशेवर गति पर साफ दिखाई दे रहा था.

अपराधबोध से स्वीकार्यता तक का सफर

कर्मचारी ने लिखा कि शुरू में बिना काम के इतनी बड़ी सैलरी लेना उसे गलत लगता था. वह पहले सेल्स विभाग में काम करते हुए कंपनी के लिए अच्छा राजस्व पैदा करता था. लेकिन समय के साथ उसका अपराधबोध धीरे-धीरे नाराजगी और फिर स्वीकार्यता में बदल गया. इस दौरान उसने पत्नी के साथ अधिक समय बिताया और जीवन को थोड़ी धीमी गति से जीने की कोशिश की.

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सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

रेडिट पर यह अनुभव वायरल होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी राय दी. कुछ यूजर्स ने इसे “ड्रीम जॉब” बताया तो कई लोगों का कहना था कि बिना काम के बैठे रहना मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकता है. कुछ लोगों ने सलाह दी कि ऐसे समय का उपयोग नई स्किल सीखने और प्रोफेशनल सर्टिफिकेट हासिल करने में किया जाना चाहिए. इस पूरी घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया कि बड़ी कंपनियों में कभी-कभी कर्मचारियों की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों को लेकर कितनी बड़ी व्यवस्थागत खामियां रह जाती हैं.

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-भारत एक्सप्रेस



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