US Iran War News: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा गतिरोध अब एक खतरनाक और निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है. अमेरिकी सेना ने रणनीतिक रूप से बेहद अहम ईरान के कोनार्क नौसैनिक अड्डेपर सटीक हमला कर दिया है. चाबहार की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट के मुहाने पर स्थित इस बेस पर हुए हमले के बाद ओमान की खाड़ी से लेकर उत्तर अरब सागर तक युद्ध की भयंकर लपटें फैल चुकी हैं.
इस बीच, ईरान ने भी पलटवार करते हुए उत्तरी अरब सागर में अमेरिकी नौसेना के अर्ले बर्क क्लास युद्धपोत को निशाना बनाने की कोशिश की है, जिससे वैश्विक राजनीति में हड़कंप मच गया है.
अरब सागर में अमेरिकी युद्धपोत पर भी वार?(US Iran War News)
तेहरान की ओर से पुष्टि की गई है कि अमेरिकी सेना ने दक्षिण-पूर्वी ईरान स्थित कोनार्क नेवी बेस पर हल्के प्रोजेक्टाइल से हमला किया, जिसमें दो ईरानी सैनिक घायल हो गए. यह बेस होर्मुज जलडमरूमध्य के ठीक बाहर स्थित है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का मुख्य मार्ग है. इस हमले के जवाब में ईरान ने उत्तरी अरब सागर में हलचल तेज कर दी और अमेरिकी डेस्र्टॉयड वॉरशिप को एंटी-शिप क्रूज मिसाइलों से घेरने की कोशिश की.
इसके तुरंत बाद अमेरिकी विमानवाहक पोत ‘यूएसएस जॉर्ज एचडब्ल्यू बुश’ से उड़ान भरने वाले F/A-18 सुपर हॉर्नेट फाइटर जेट्स ने दक्षिण-पूर्वी ईरान में IRGC के ठिकानों पर ताबड़तोड़ बमबारी कर दी.
ईरान की रीढ़ ‘खर्ग द्वीप’ पर अमेरिकी नजर
इस बीच भू-राजनीतिक गलियारों से आ रही सबसे बड़ी खबर यह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने प्रशासन और खुफिया एजेंसी CIA के साथ मिलकर ईरान के सबसे बड़े तेल निर्यात केंद्र खर्ग द्वीप (Kharg Island) पर हमले के विकल्पों पर विचार कर रहे हैं.
गौरतलब है कि ईरान के कुल तेल निर्यात का 90 प्रतिशत हिस्सा इसी आईलैंड से संचालित होता है. यदि अमेरिका इस ऊर्जा केंद्र को निशाना बनाता है, तो यह ईरान की अर्थव्यवस्था पर अब तक का सबसे बड़ा और घातक आर्थिक प्रहार होगा.
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होर्मुज बंद होने का संकट
अमेरिका की इस आक्रामक रणनीति का मुख्य उद्देश्य ईरान को परमाणु कार्यक्रमों और होर्मुज स्ट्रेट के अहम मुद्दों पर पूरी तरह झुकाना है. अमेरिका में आगामी मध्यावधि चुनावों (Midterm Elections) से ठीक पहले उठाए जा रहे इन कदमों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता पैदा कर दी है. जिस तरह से जंग का दायरा ओमान की खाड़ी से निकलकर अरब सागर तक पहुंच गया है, उससे यह साफ है कि आने वाले दिनों में यह संघर्ष पूरी दुनिया के लिए एक बड़ा आर्थिक और सैन्य संकट बन सकता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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