प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विजयादशमी के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए सभी के सुख, समृद्धि और सफलता की कामना की. मंगलवार को उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर संदेश साझा कर कहा कि विजयादशमी का यह पर्व लोगों के भीतर नई ऊर्जा और आत्मविश्वास जगाए. इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने भगवान श्रीराम की महिमा बताने वाला संस्कृत का एक सुभाषित भी साझा किया और उनके आदर्शों को याद किया.
पीएम मोदी के संदेश में त्योहार की खुशियों के साथ-साथ भगवान श्रीराम के जीवन से मिलने वाली सीख पर भी जोर दिया गया. विजयादशमी को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है. ऐसे में श्रीराम के चरित्र और उनके आदर्शों का उल्लेख इस पर्व के महत्व को और खास बनाता है.
पीएम मोदी ने एक्स पर क्या लिखा?
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने शुभकामना संदेश में लिखा, “आप सभी को विजयादशमी की अनंत शुभकामनाएं. उल्लास और विश्वास का यह विजय पर्व हर किसी के संकल्प को नई शक्ति प्रदान करे. सभी का जीवन सुख-सौभाग्य और सफलता से समृद्ध हो, यही कामना है.”
उनके इस संदेश का मुख्य भाव यही है कि विजयादशमी का त्योहार लोगों को अपने लक्ष्य हासिल करने की प्रेरणा दे. साथ ही, हर व्यक्ति के जीवन में खुशहाली आए और वह पूरे विश्वास के साथ आगे बढ़े.
भगवान श्रीराम को बताया धर्म का साक्षात स्वरूप
शुभकामना संदेश के अलावा प्रधानमंत्री ने संस्कृत का एक श्लोक भी साझा किया, जिसमें भगवान श्रीराम के गुणों और उनके व्यक्तित्व का वर्णन किया गया है. यह श्लोक महर्षि वाल्मीकि की रचना ‘वाल्मीकि रामायण’ के अरण्यकांड के 37वें सर्ग का 13वां श्लोक है.
श्लोक है:
“रामो विग्रहवान् धर्मस्साधुस्सत्यपराक्रमः.
राजा सर्वस्य लोकस्य देवानां मघवानिव॥”
इसका अर्थ है कि भगवान श्रीराम धर्म के साक्षात स्वरूप हैं. वे सज्जनों के रक्षक, सत्य का पालन करने वाले और पराक्रम में अद्वितीय हैं. जिस तरह देवराज इंद्र पूरे देवलोक की रक्षा और व्यवस्था संभालते हैं, उसी तरह श्रीराम समस्त संसार के पालन और संरक्षण करने वाले हैं.
रामो विग्रहवान् धर्मस्साधुस्सत्यपराक्रमः।
राजा सर्वस्य लोकस्य देवानां मघवानिव॥ https://t.co/up7GplXzTg
— Narendra Modi (@narendramodi) October 20, 2026
इस श्लोक में श्रीराम को केवल एक महान योद्धा या राजा के रूप में नहीं, बल्कि ऐसे आदर्श व्यक्तित्व के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिनके जीवन का हर कदम धर्म और सत्य से जुड़ा है.
श्रीराम के जीवन से मिलती है धर्म के रास्ते पर चलने की सीख
वाल्मीकि रामायण में भगवान श्रीराम के जीवन के कई ऐसे प्रसंग मिलते हैं, जो कठिन परिस्थितियों में भी सही रास्ता चुनने की प्रेरणा देते हैं. अरण्यकांड में ऋषियों और वन में रहने वाले साधु-संतों पर राक्षसों के अत्याचार का प्रसंग भी आता है. ऐसे समय में श्रीराम ने उनकी रक्षा करने और अन्याय के खिलाफ खड़े होने का संकल्प लिया था.
यह प्रसंग बताता है कि श्रीराम के लिए धर्म केवल कहने या सुनने की बात नहीं था. उन्होंने अपने आचरण से इसे जीकर दिखाया. चाहे बेटे के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभानी हो, भाई के प्रति प्रेम और कर्तव्य दिखाना हो या फिर राजा के रूप में प्रजा की रक्षा करनी हो, उनके जीवन में धर्म और मर्यादा को हमेशा खास स्थान मिला.
यही वजह है कि भगवान श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है. उनका जीवन सिखाता है कि मुश्किल समय में भी सत्य, कर्तव्य और न्याय का साथ नहीं छोड़ना चाहिए.
विजयादशमी का संदेश भी यही है
विजयादशमी को देशभर में बुराई पर अच्छाई और अन्याय पर न्याय की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है. इस दिन रावण दहन की परंपरा भी इसी संदेश को सामने रखती है कि अहंकार, गलत आचरण और अधर्म का अंत निश्चित है.
प्रधानमंत्री मोदी की ओर से साझा किया गया संस्कृत श्लोक भी इसी भावना को रेखांकित करता है. भगवान श्रीराम का चरित्र याद दिलाता है कि असली ताकत केवल शक्ति या पद में नहीं, बल्कि सही फैसले लेने, अपने कर्तव्य निभाने और दूसरों की रक्षा करने में होती है.
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-भारत एक्सप्रेस
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