आम लोगों और पुलिसकर्मियों को पोस्टमार्टम या मेडिको-लीगल रिपोर्ट हासिल करने के लिए अब सरकारी दफ्तरों या थानों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे. इलाहाबाद हाई कोर्ट के सख्त रुख के बाद अब यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होने जा रही है. एनआईसी (NIC) ने ‘MedLeaPR’ पोर्टल को पुलिस के ‘CCTNS’ (क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स) से पूरी तरह जोड़ दिया है. इससे पुलिस को एफआईआर से लिंक्ड रिक्वेस्ट भेजते ही सीधे सिस्टम पर ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिल जाएगी.
हाई कोर्ट में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की पीठ में जैरुन्निशा की याचिका पर सुनवाई के दौरान एक बड़ा खुलासा हुआ. प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस इंचार्ज डॉ. राजीव रंजन ने कोर्ट को बताया कि 15 मई 2025 से 22 अक्टूबर 2026 के बीच जिले में कुल 3,707 पोस्टमार्टम हुए. हालांकि, इस दौरान पुलिस ने ऑनलाइन सिस्टम पर सिर्फ 2 मामलों में ही रिक्वेस्ट भेजी.
इस पर हाई कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की. एडीजी (तकनीकी) ने सफाई देते हुए माना कि कुछ तकनीकी दिक्कतों और जागरूकता की कमी की वजह से पुलिसकर्मी सही से रिक्वेस्ट नहीं भेज पा रहे हैं. उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे सभी पुलिस अधिकारियों को जागरूक और सेंसिटाइज करेंगे.
शीर्ष अधिकारियों की हाई-लेवल मीटिंग
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने आदेश दिया है कि 4 नवंबर 2026 को सुबह 11 बजे लखनऊ स्थित प्रिंसिपल सेक्रेटरी (मेडिकल हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर) के दफ्तर में एनआईसी और पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मिलकर एक खास बैठक करेंगे.
कोर्ट ने उम्मीद जताई कि एनआईसी, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मिलकर तकनीकी अड़चनों को दूर कर लेंगे, ताकि पोस्टमार्टम और मेडिको-लीगल रिपोर्ट समय पर पोर्टल पर अपलोड हो सके और जांच में बेवजह की देरी खत्म हो सके. इसके साथ ही अदालत ने इस मामले को पूरी तरह निस्तारित कर दिया.
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-भारत एक्सप्रेस
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