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केरल में बदल गया सियासी नक्शा! कांग्रेस की सरकार में मुस्लिम लीग का वीटो, भाजपा ने भी रची नई हिस्ट्री

केरल विधानसभा चुनाव 2026 में यूडीएफ (UDF) की जीत के बाद वी.डी. सतीशन को मुख्यमंत्री चुना गया है, जिसमें 22 सीटें जीतने वाली इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) की भूमिका सबसे निर्णायक रही. मुस्लिम लीग की इस बढ़ती ताकत ने जहां कांग्रेस की निर्भरता बढ़ा दी है.

Kerala Politics How IUML's Rising Power Forces Congress to Compromise

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Edited by Vaibhav Gupta

Kerala Politics: केरल विधानसभा चुनाव 2026 में कांग्रेस नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) की जीत के बाद राज्य की राजनीति एक बार फिर चर्चा में है. खासतौर पर इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) की भूमिका को लेकर बहस तेज हो गई है. IUML ने रिकॉर्ड 22 सीटें जीतीं, जो उसकी अब तक की सबसे बेहतर प्रदर्शन में से एक है. कांग्रेस ने V.D. सतीशन (Satheesan) को मुख्यमंत्री पद के लिए चुना, जिसमें IUML का खुला समर्थन निर्णायक साबित हुआ.

IUML का CM चयन में रोल

UDF की कुल 102 सीटों में कांग्रेस को करीब 63 और IUML को 22 मिलीं. CM पद के लिए कांग्रेस के अंदर V.D. सतीशन, K.C. वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला के बीच होड़ थी. रिपोर्ट्स के अनुसार, IUML ने शुरुआत से ही सतीशन का साथ दिया. केरल कांग्रेस (जोसेफ) जैसे अन्य सहयोगियों का भी समर्थन रहा. कांग्रेस हाई कमान ने अंततः सतीशन को चुना, जिसे IUML की प्राथमिकता और ग्रासरूट समर्थन का नतीजा माना जा रहा है.

भाजपा ने इसे कांग्रेस द्वारा IUML के सामने “झुकने” के रूप में आलोचना की और कहा कि कांग्रेस अब “नई मुस्लिम लीग” बन गई है. IUML की 22 सीटों वाली ताकत UDF सरकार में उसकी bargaining power को बढ़ाती है.

मुस्लिम वोट का ब्लॉक और मल्लापुरम

केरल में मुस्लिम बहुल इलाकों, खासकर मलप्पुरम जिले में IUML की पकड़ दशक पुरानी है. मल्लापुरम विधानसभा सीट 1957 से लगातार IUML जीतती आ रही है. कांग्रेस या लेफ्ट के उम्मीदवार येां कभी सफल नहीं हुए. 2026 में भी IUML का दबदबा कायम रहा.

राज्य में मुस्लिम मतदाताओं के बीच IUML की लोकप्रियता स्पष्ट है. कांग्रेस के टिकट पर 8 और लेफ्ट के टिकट पर 5 मुस्लिम विधायक चुने गए, लेकिन IUML की 22 सीटें उसकी ताकत दिखाती हैं. विपक्षी दलों के लिए ये चिंता का विषय है कि कुछ क्षेत्रों में वोटिंग पैटर्न कम्युनल लाइनों पर मजबूत हो रहा है.

वायनाड और गांधी परिवार पर दबाव?

कुछ रिपोर्ट्स और राजनीतिक चर्चाओं में दावा किया जाता है कि IUML ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को वायनाड से सांसद बनवाने में मदद की थी. वायनाड मुस्लिम बहुल क्षेत्र है, जहां UDF का गठबंधन निर्णायक रहता है. IUML का समर्थन येां कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण है, जिसका असर राज्य स्तर की राजनीति पर भी पड़ता है.

क्या टल जाता विभाजन?

लेखक ने नेहरू-जिन्ना युग का जिक्र किया है. इतिहासकारों में ये बहस पुरानी है कि अगर कांग्रेस जिन्ना को PM बनाने या अन्य समझौते पर राजी हो जाती तो विभाजन टल सकता था या नहीं. वास्तविकता ये है कि 1940 के दशक में communal polarization बहुत गहरा चुका था. मुस्लिम लीग की ‘Two Nation Theory’ और Direct Action Day जैसे घटनाक्रमों ने विभाजन को अपरिहार्य बना दिया. लाखों मौतें और विस्थापन एक त्रासदी थी, जिसके सबक आज भी प्रासंगिक हैं- coalition politics में छोटे दलों की leverage बढ़ सकती है, लेकिन लंबे समय में मजबूत राष्ट्र-निर्माण communal vote banks पर निर्भर नहीं होना चाहिए.

भाजपा का उभार

रोचक ये कि 2026 चुनाव में भाजपा ने भी रिकॉर्ड 3 सीटें (नेमोम, कझकोट्टम, चथन्नूर) जीतीं- राज्य में उसका अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन. ये दर्शाता है कि केरल की राजनीति द्विध्रुवीय नहीं रह गई है. UDF की जीत के बावजूद, polarization के दोनों तरफ आवाजें मजबूत हो रही हैं.

केरल की राजनीति गठबंधनों, क्षेत्रीय पहचानों और वोट ब्लॉक्स का मिश्रण है. IUML की बढ़ती भूमिका कांग्रेस की मजबूरी को उजागर करती है- बिना मजबूत सहयोगियों के कांग्रेस अकेले सरकार नहीं बना सकती. वहीं, सेकुलरिज्म की बहस में ये सवाल भी उठता है कि जब कोई पार्टी मुस्लिम-बहुल क्षेत्रों में लगातार एक ही communal पार्टी पर निर्भर रहती है, तो क्या वह truly inclusive है?

केरल विकास, शिक्षा और सामाजिक harmony के लिए जाना जाता है. नई सरकार को उम्मीद है कि coalition dynamics विकास, रोजगार और कानून-व्यवस्था पर फोकस करें, न कि सिर्फ vote bank politics पर. राजनीति रोचक बनी रहेगी, लेकिन जनता को उम्मीद होगी कि ये राज्य की एकता को कमजोर न करे.

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-भारत एक्सप्रेस



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