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विश्लेषण

किसानों की यह लड़ाई किसी मोलभाव की नहीं, अपने हक की है. सरकार की ही गठित एमएस स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें धूल फांक रही हैं.

जबसे मुसलमान शासक भारत में आए तब से गौवंश की हत्या होनी शुरू हुई. हिन्दू लाख समझाते रहे कि गौमाता सारे संसार की जननी के समान है.

डॉ. मनमोहन सिंह की सादगी और विनम्रता पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं. प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए भी उन्होंने जिस आत्मीयता और सरलता का परिचय दिया, वह हमेशा यादगार और अनुकरणीय रहेगा.

शाह बानो केस 1985 में भारत में महिला अधिकारों और धर्मनिरपेक्षता पर गहरी बहस छेड़ने वाली घटना थी, जब सुप्रीम कोर्ट ने तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं को गुजारा भत्ता देने का हक़ दिया, लेकिन राजीव गांधी सरकार ने धार्मिक तुष्टीकरण के लिए इसे पलट दिया. यह मामला आज भी भारत में धार्मिक और लैंगिक न्याय पर विमर्श को प्रभावित करता है.

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वायपेयी के जन्मदिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक आलेख में कहा कि आज 25 दिसंबर का ये दिन भारतीय राजनीति और भारतीय जनमानस के लिए एक तरह से सुशासन का अटल दिवस है.

अभी हाल में तीन छात्रों की हत्या ने कनाडा की कानून व्यवस्था, भारतीयों की सुरक्षा और सरकार की मंशा पर गंभीर शक पैदा हो रहा है. कनाडा में भारतीय छात्रों को प्रमुख दस्तावेजों को फिर से जमा करने के लिए आमजन, शरणार्थी और नागरिकता (आईआरसीसी) से दो चार होना पड़ रहा है, जिससे चिंता बढ़ गई है.

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद सीएम देवेंद्र फडणवीस और उद्धव ठाकरे की पहली बार मुलाकात हुई. वैसे विरोधी नेताओं के बीच मुलाकात कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन उद्धव ठाकरे जिस तरह से अचानक देवेंद्र फडणवीस से मिलने पहुंचे, वो वाकई में हैरान करने वाली है.

जॉर्ज सोरोस अमेरिकी कारोबारी और निवेशक हैं. अमेरिकी दक्षिणपंथियों के अलावा दूसरे देशों के दक्षिणपंथियों के भी निशाने पर सोरोस हमेशा रहते हैं.

इतिहासकार और प्रधानमंत्री म्यूजियम और लाइब्रेरी के सदस्य रिजवान कादरी ने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की चिट्ठियों को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी को एक खत लिखा है, जिसमें उन चिट्ठियों को वापस लौटाए जाने की मांग की है.

सवाल बिल्कुल जायज है. क्या ऐसा नहीं है कि देश के साथ अनेक मोर्चों पर गद्दारी करने वालों में विभिन्न प्रांतों के अनेक हिन्दू ही शामिल रहे हैं तो फिर ऐसी अपेक्षा मुसलमानों से ही क्यों?