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रजनीश कपूर, वरिष्ठ पत्रकार




भारत एक्सप्रेस


तनाव और मानसिक दबाव से राहत पाने के लिए लोग तेजी से संगीत, समूह गायन और भजन क्लबिंग जैसी गतिविधियों की ओर रुख कर रहे हैं. वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि संगीत कोर्टिसोल कम कर मूड बेहतर बनाता है, जबकि ग्रुप सिंगिंग सामाजिक जुड़ाव और मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत करती है.

दिल्ली के मालवीय नगर अग्निकांड ने एक बार फिर आग से सुरक्षा और आपदा प्रबंधन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि सही जागरूकता, धैर्य और प्राथमिक सुरक्षा उपाय अपनाकर कई जानें बचाई जा सकती हैं...

गुरमीत राम रहीम को बार-बार मिल रही पैरोल और जेल में विशेष सुविधाओं ने भारतीय न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. क्या वीआईपी अपराधियों के लिए जेल अब होटल बन चुकी हैं?

वर्तमान शिक्षा प्रणाली पर उठते सवालों के बीच यह बहस तेज हो गई है कि क्या आज की पढ़ाई युवाओं को नौकरी और जीवन के लिए वास्तव में तैयार कर पा रही है. लेख में रट्टा आधारित शिक्षा, बेरोजगारी, मानसिक दबाव और स्किल गैप जैसी गंभीर समस्याओं को विस्तार से उठाया गया है...

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद सरकार की नई सोना नीति पर सोशल मीडिया में बहस तेज हो गई है. ई-गोल्ड और गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम से सोना डिजिटल संपत्ति बनेगा.

हालिया चुनावी नतीजों ने विपक्ष के लिए 'आत्मचिंतन' के द्वार खोल दिए हैं. पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विवाद से लेकर तमिलनाडु में नए राजनीतिक विकल्पों के उदय तक, यह विश्लेषण बताता है कि केवल बीजेपी-विरोध से काम नहीं चलेगा.

India ethanol blending: भारत सरकार पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग को E20 से आगे बढ़ाकर E85 और E100 तक ले जाने की योजना बना रही है. फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देने से तेल आयात पर निर्भरता घटेगी, विदेशी मुद्रा बचेगी और प्रदूषण कम होगा लेकिन माइलेज और पानी की खपत पर असर पड़ सकता है.

दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट के फैसले में CBI के एक वरिष्ठ अधिकारी को दोषी ठहराए जाने के बाद एजेंसी की विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं. अदालत ने ‘मालाफाइड’ कार्रवाई को गैर-कानूनी माना. अब अनुच्छेद 311 और सीसीएस (सीसीए) नियम 19 के तहत विभागीय कार्रवाई की मांग तेज हो गई है.

नोएडा में मजदूरों का हिंसक प्रदर्शन सिर्फ स्थानीय घटना नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए चेतावनी है. न्यूनतम मजदूरी में अंतर, महंगाई और संवाद की कमी ने आग भड़काई.

देश के अधिकांश पुलिस स्टेशन अभी भी पुरानी इमारतों में हैं, जहां बुनियादी सुविधाएं जैसे वाहन, फोन, शौचालय और डिजिटल सिस्टम तक की भारी कमी है. 2025 के आंकड़ों के अनुसार 58 स्टेशनों में वाहन नहीं, 680 में लैंडलाइन फोन नहीं और कई में मालखाना गंदा व असुरक्षित है, जिससे जांच में देरी और सबूत खराब हो रहे हैं...