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विनीत नारायण, वरिष्ठ पत्रकार




भारत एक्सप्रेस


कोरिया से लेकर वेनेजुएला तक और वियतनाम से लेकर ईरान तक, क्या अमेरिका की विदेश नीति केवल 'झूठ और दादागिरी' पर टिकी है? सोशल मीडिया पर वायरल एक पोस्ट ने 1950 से लेकर 2026 तक के अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेपों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

काठमांडू की साफ-सुथरी सड़कों, शौचालयों और ट्रैफिक व्यवस्था ने दिल्ली को पीछे छोड़ दिया है. वहीं भारत का ‘स्वच्छ भारत अभियान’ प्रचार के बावजूद जमीनी स्तर पर कमजोर दिखता है.

Opinion On Epstein Files: 'एपस्टीन फाइल्स ट्रांसपेरेंसी एक्ट' के तहत 35 लाख पन्ने जारी हुए हैं. इसमें प्रिंस एंड्रयू की गिरफ्तारी के बाद खलबली मची हुई है. दुनिया के दिग्गजों के नाम इसमें आए हैं. हालांकि, इसके बीद भी खामोशी छाई हुई है. पढ़ें पत्रकार विनीत नारायण का ओपिनियन

फरवरी 2026 में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार HbA1c टेस्ट एनीमिया और आनुवंशिक विकारों के कारण डायबिटीज का गलत निदान कर सकता है. विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि भारत जैसे देशों में केवल HbA1c पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है...

काशी के मणिकर्णिका घाट पर उठा विवाद भारत के धार्मिक शहरों में विकास और धरोहर संरक्षण के टकराव को उजागर करता है. विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि गलत प्लानिंग ने आस्था, वास्तुकला और इतिहास तीनों को खतरे में डाल दिया है.

India EU FTA: भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुआ ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ भारत के लिए बड़े अवसर लेकर आया है. यह निर्यात, निवेश और रोजगार बढ़ा सकता है, लेकिन कृषि, एमएसएमई और नीति-स्वायत्तता को लेकर जोखिम भी हैं.

भारत गंभीर जल संकट से जूझ रहा है. 2025-26 में दूषित नल के पानी से 5,500 से अधिक लोग बीमार हुए और 34 मौतें हुईं. गंगा-यमुना जैसी नदियां औद्योगिक अपशिष्ट और सीवेज से प्रदूषित हैं.

दिसंबर 2025 में अमेरिकी कांग्रेस की हाउस ज्यूडिशियरी कमिटी ने एफबीआई निदेशक काश पटेल (Kash Patel) को एपस्टीन फाइलों, एफबीआई की पारदर्शिता और राजनीतिकरण जैसे मुद्दों पर सुनवाई के लिए बुलाया.

Food Adulteration Crisis: देश की तमाम बड़ी समस्याओं में एक बड़ी समस्या मिलावट की है. अगर यह खाद्य पदार्थों में हो तो और गहरा हो जाता है. पढ़िये विनीत नारायण को ओपिनियन

सुप्रीम कोर्ट के नए आदेश ने अरावली पर्वत शृंखला के बड़े हिस्से को संरक्षण से बाहर कर दिया है. जानिए कैसे 100 मीटर की ऊंचाई का यह पैमाना दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण, जल संकट और खनन के खतरे को बढ़ा सकता है.