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विशाल तिवारी, संपादकीय सलाहकार




भारत एक्सप्रेस


प्रो. दौलत सिंह कोठारी भारत के प्रमुख वैज्ञानिक और शिक्षाविद थे. उन्होंने रक्षा विज्ञान के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, डिफेंस साइंस ऑर्गनाइजेशन (बाद में DRDO) की नींव रखी, UGC को मजबूत किया और कोठारी आयोग के माध्यम से भारतीय शिक्षा व्यवस्था में ऐतिहासिक सुधारों का मार्ग प्रशस्त किया.

Grand Old Man of India: 6 जुलाई 1892 को दादाभाई नौरोजी ब्रिटिश संसद के सदस्य बनने वाले पहले भारतीय बने. 'ग्रैंड ओल्ड मैन ऑफ इंडिया' कहे जाने वाले नौरोजी ने अपनी 'ड्रेन थ्योरी' से अंग्रेजों की आर्थिक लूट को दुनिया के सामने उजागर किया और भारतीय राष्ट्रवाद को अंतरराष्ट्रीय मंच दिया.

Indian Scientific System: भारतीय डीएनए फिंगरप्रिंटिंग के जनक प्रो. लालजी सिंह की जयंती पर उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं. एक किसान परिवार से वैश्विक पहचान बनाने वाले प्रो. सिंह ने भारत की आनुवंशिक विविधता को रेखांकित किया और विज्ञान का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए ग्रामीण-शहरी खाई को पाटने व योग्यता को बढ़ावा देने पर जोर दिया.

गुलजारीलाल नंदा भारत के उन चुनिंदा नेताओं में से एक थे जिन्होंने अपना पूरा जीवन सादगी, ईमानदारी और देशसेवा को समर्पित कर दिया.

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के साधारण गांव गढ़ा से निकलकर करोड़ों श्रद्धालुओं के हृदय में विराजमान पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की यह यात्रा, लेखक सचिन चौधरी के व्यक्तिगत अनुभवों से बुनी गई है.

डॉ. सुधांशु कुमार बनर्जी, जिन्हें "मेघ बनर्जी" के नाम से भी जाना जाता है. उन्होंने 1952 में साधारण हाइड्रोजन गुब्बारों की मदद से क्लाउड सीडिंग का सफल प्रयोग कर इतिहास रच दिया.

American Revolution History: जानें ब्रिटिश साम्राज्य के भारी टैक्स के खिलाफ 13 उपनिवेशों की बगावत और जॉर्ज वॉशिंगटन के अमेरिका के पहले राष्ट्रपति बनने की ऐतिहासिक कहानी.

खाशाबा दादासाहेब जाधव की प्रेरणादायक कहानी अब फिल्म के जरिए बड़े पर्दे पर लौट रही है.

3 जुलाई को भारतीय सेना के सबसे ऊंचे रैंक के शहीद अधिकारी ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान का शहादत दिवस है. 'द लायन ऑफ नौशेरा' के नाम से मशहूर इस वीर योद्धा ने झंगड़ को दुश्मनों से वापस छीनने के लिए जमीन पर सोने की कसम खाई थी.

Indian Press Blackout: 2 जुलाई 1986 को भारत में अखबारों का प्रकाशन बंद रहा. राजीव गांधी सरकार और अखबार मालिकों के बीच वेतन बोर्ड के फैसले को लेकर हुए टकराव ने प्रेस ब्लैकआउट को जन्म दिया.