विशाल तिवारी, संपादकीय सलाहकार
भारत एक्सप्रेस
100 साल का हुआ UPSC: जानिए कैसे ली कमीशन की सिफारिश से बदला भारत का प्रशासनिक ढांचा
1 अक्टूबर 1926 को स्थापित UPSC ने 1 अक्टूबर 2026 को अपना शताब्दी वर्ष पूरा किया. जानिए ईस्ट इंडिया कंपनी के दौर से लेकर धौलपुर हाउस और संवैधानिक निकाय बनने तक की पूरी यात्रा.
अंतरराष्ट्रीय अनुवाद दिवस: जानिए शब्दों के पार कैसे गूंजती है भोजपुरी की लोक-संस्कृति?
प्रत्येक वर्ष 30 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय अनुवाद दिवस मनाया जाता है. यह दिवस संत जेरोम की स्मृति में मनाया जाता है, जिन्हें अनुवादकों का संरक्षक संत माना जाता है. संत जेरोम ने चौथी-पाँचवीं शताब्दी में बाइबल का लैटिन में अनुवाद किया था, जिसे ‘वulgेट’ के नाम से जाना जाता है.
बड़ा देश, बड़ी आबादी… क्या छोटे राज्यों से सुधरेगा देश का प्रशासन?
भारत में बड़े राज्यों के आकार और प्रशासनिक क्षमता को लेकर बहस लंबे समय से चल रही है. तेलंगाना के गठन और उसके बाद हुए विकास ने छोटे राज्यों की संभावनाओं को फिर चर्चा में ला दिया है.
दिल्ली यूनिवर्सिटी के शिवाजी कॉलेज में धूमधाम से हुआ हिंदी माह 2026 का समापन, गजल की प्रस्तुति ने मोहा मन
शिवाजी कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय की राजभाषा समिति एवं बी.ए. प्रोग्राम विभाग के संयुक्त तत्त्वावधान में हिंदी माह 2026 (1–30 सितंबर) के अंतर्गत आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों की श्रृंखला के समापन अवसर पर 30 सितंबर 2026 को पेशवा बाजीराव सभागार में हिंदी माह 2026 का समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया गया.
हर घर में गूंजती है जिनकी आरती: जानिए कौन थे ‘ओम जय जगदीश हरे’ के अमर रचयिता पंडित श्रद्धाराम फिल्लौरी
Hindi Literature: विश्व प्रसिद्ध आरती 'ओम जय जगदीश हरे' के रचयिता पंडित श्रद्धाराम फिल्लौरी न केवल एक धार्मिक रचनाकार थे, बल्कि उन्होंने हिंदी के आरंभिक उपन्यासों में से एक 'भाग्यवती' लिखकर साहित्य और समाज सुधार को एक नई दिशा दी.
न सांसद, न विधायक फिर भी राजनीति के अमर योद्धा, जानिए क्यों आज भी प्रासंगिक हैं पंडित दीनदयाल उपाध्याय?
पंडित दीनदयाल उपाध्याय न सांसद बने न विधायक, लेकिन सिद्धांतों और मूल्यों की राजनीति के दम पर वे भारतीय इतिहास में अमर हो गए. जानिए उनके प्रेरक जीवन के अहम प्रसंग.
गोल्ड की तैयारी या ब्रॉन्ज पाकर संतुष्टि? जानिए एशियाई खेलों में भारत की उम्मीदों के अटकने की पूरी कहानी
एशियाई खेलों को देखते हुए एक अजीब सी निराशा घेर लेती है. जिन स्पर्धाओं में भारत के जीतने की कोई खास उम्मीद नहीं होती, उनमें भी भारत अक्सर खाली हाथ लौटता है. और जिन स्पर्धाओं में गोल्ड की अच्छी संभावना दिखती है, वहां भी निराशा ही हाथ लगती है.
‘राष्ट्रहित के सामने राजा का कोई मूल्य नहीं’, जानिए पंडित दीनदयाल की पुस्तकों पर क्यों छिड़ी शैक्षणिक बदलाव की चर्चा
इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती की परिचर्चा में साहित्यकारों ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुस्तकों 'जगद्गुरु श्रीशंकराचार्य' और 'सम्राट चन्द्रगुप्त' को पाठ्यक्रमों में शामिल करने की मांग की.
जब बच्चे कहानी पढ़ने से पहले खो जाते थे तस्वीरों में… याद आए ‘चंदामामा’ के मशहूर आर्टिस्ट के.सी. शिवाशंकर
आज 29 सितंबर को चन्दामामा के प्रसिद्ध चित्रकार के.सी. शिवाशंकर की छठी पुण्यतिथि है. 29 सितंबर 2020 को चेन्नई में 97 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया था. वे चन्दामामा के अंतिम जीवित कलाकारों में से एक थे और उनकी कला ने पीढ़ियों को मोहित किया.
90 की उम्र के बाद भी रोज 12 घंटे करती थीं काम, जानिए कौन थीं भारत की ‘गॉडमदर ऑफ कार्डियोलॉजी’
भारत की पहली महिला हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. एस.आई. पद्मावती ने युद्ध, सामाजिक बंदिशों और लैंगिक भेदभाव के बीच अपने चिकित्सा करियर की शुरुआत की और भारत में आधुनिक कार्डियोलॉजी की नींव रखने में अहम भूमिका निभाई.







