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विशाल तिवारी, संपादकीय सलाहकार




भारत एक्सप्रेस


ब्रिटिश राज में दिल्ली के सांपों को खत्म करने के लिए मरे कोबरा पर इनाम की योजना शुरू हुई, लेकिन इसका नतीजा उल्टा रहा. जानिए क्या है अर्थशास्त्र का 'कोबरा इफेक्ट'.

13 सितंबर 1948 को शुरू हुए 'ऑपरेशन पोलो' ने महज 108 घंटे में हैदराबाद का भारत में विलय करा दिया. जानिए सरदार पटेल की दूरदर्शिता और निजाम के पतन की पूरी कहानी.

महज 295 रुपये से शुरू होकर 1.21 लाख करोड़ की कंपनी बनने वाली ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज का 134 साल पुराना इतिहास. जानिए कैसे विदेशी हाथों से निकलकर यह बनी देश की सबसे बड़ी खाद्य कंपनी.

Singapore Economy History: 1965 में मलेशिया से अलग होकर स्वतंत्र हुए सिंगापुर को ली क्वान यू ने एक पीढ़ी के भीतर वैश्विक वित्तीय केंद्र बना दिया. क्या उनका अनुशासित मॉडल भारत के काम आ सकता है?

लाल थानहॉला की कहानी सिर्फ एक व्यक्ति के राजनीतिक सफर की नहीं है, बल्कि यह मिज़ोरम के उस मुश्किल दौर और उसके पुनर्निर्माण की दास्तान है, जब राज्य ने अलगाव और हिंसा के अंधेरे से निकलकर लोकतंत्र और शांति की रोशनी को अपनाया.

जब हम दूरदर्शन के इतिहास को याद करते हैं, तो हमारे जेहन में कुछ जाने-पहचाने चेहरे और पुरानी सिग्नेचर ट्यून घूम जाती है. लेकिन उस कैमरे के पीछे, उस कंट्रोल रूम की धुंधली रोशनी में और उन भारी-भरकम मशीनों के बीच काम करने वाली महिलाओं का पसीना इस इतिहास का सबसे मजबूत स्तंभ है.

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने एक प्रस्ताव पारित कर 500 साल पुराने मर्केटर मैप को कम करने और Equal Earth प्रोजेक्शन को बढ़ावा देने का फैसला किया है. आलोचकों का मानना था कि पुराना नक्शा अफ्रीका और भूमध्यरेखीय क्षेत्रों के वास्तविक आकार को छोटा दिखाता था.

भारत में टेलीविजन प्रसारण की शुरुआत 15 सितंबर 1959 को नई दिल्ली से हुई थी. शुरुआती दौर में टीवी का मकसद मनोरंजन से ज्यादा शिक्षा और विकास था.

स्वामी धीरेन्द्र ब्रह्मचारी सिर्फ एक योग गुरु नहीं थे, बल्कि उनकी पहुंच देश के सत्ता के गलियारों तक थी. इंदिरा गांधी और संजय गांधी के करीबी माने जाने वाले ब्रह्मचारी का जीवन योग, राजनीति, प्रभावशाली संपर्क, आलीशान जीवनशैली और विवादों से भरा रहा.

भारत जैसे बहुभाषी और बहुसांस्कृतिक राष्ट्र में एकता की सबसे मजबूत कड़ी भाषा और संस्कृति का सकारात्मक संवाद है. आज जब कुछ राष्ट्र-विरोधी तत्त्व राजनीतिक लाभ के लिए हिंदी विरोध को दक्षिण भारत में फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, तब क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देते हुए हिंदी को सेतु भाषा के रूप में मजबूत करने की आवश्यकता और बढ़ गई है.