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विशाल तिवारी, संपादकीय सलाहकार




भारत एक्सप्रेस


उत्तराखंड की नंदा देवी की बर्फीली चोटियों में छिपा है एक ऐसा रहस्य, जिसका संबंध भारत-अमेरिका के गुप्त मिशन और चीन के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा है.

देवेश कपूर और अरविंद सुब्रमण्यन की पुस्तक 'A Sixth of Humanity' स्वतंत्र भारत की विकास यात्रा को डेटा और तुलनात्मक नजरिए से पेश करती है. यह किताब भारतीय लोकतंत्र और अर्थव्यवस्था की अप्रत्याशित सफलताओं व संरचनात्मक चुनौतियों का विश्लेषण करती है.

19 अक्टूबर 1910 को लाहौर (तब ब्रिटिश भारत, अब पाकिस्तान) में जन्मे सुब्रह्मण्यम चंद्रशेखर आधुनिक खगोलभौतिकी के महानतम वैज्ञानिकों में से एक थे. वे नोबेल पुरस्कार विजेता सर चंद्रशेखर वेंकट रमन के भतीजे थे.

आनंद नीलकंठन की किताब विविध रामायण, विविध पाठ बताती है कि रामायण सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि सदियों से चली आ रही अनेक कथाओं और परंपराओं का संगम है.

मिडिल ईस्ट फोरम के विशेषज्ञों के अनुसार, चीन की घटती आबादी और जनसांख्यिकीय संकट भारत के लिए बड़ा खतरा बन सकता है. आंतरिक समस्याओं से ध्यान भटकाने के लिए बीजिंग भारत के साथ सीमा विवाद भड़का सकता है.

18 अक्टूबर 1969 को हैदराबाद के लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में भारत-न्यूजीलैंड टेस्ट के दौरान पिच विवाद और पुलिसिया कार्रवाई से भड़की हिंसा में स्टेडियम में आगजनी और पथराव हुआ था.

ND Tiwari Birth Anniversary: नारायण दत्त तिवारी भारतीय राजनीति के ऐसे दुर्लभ नेता थे, जिन्होंने यूपी और उत्तराखंड दोनों राज्यों के सीएम पद को संभाला. 18 अक्टूबर को ही उनका जन्म और निधन हुआ। विकास पुरुष से लेकर डीएनए-सेक्स स्कैंडल विवाद तक, जानिए उनकी पूरी कहानी.

Supreme Court: हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम अपनाने वालों को अब मुस्लिम OBC कोटे का लाभ सीधे नहीं मिलेगा. सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए आरक्षण, धर्म परिवर्तन और जाति व्यवस्था पर एक अहम कानूनी सीमा रेखा खींच दी है.

1943 के बंगाल अकाल में लाखों लोगों ने भूख और कुपोषण के कारण अपनी जान गंवाई, लेकिन इसी दौरान दुर्गा पूजा की परंपरा भी जारी रही. कहीं पूजा की थालियों में तरह-तरह के पकवान सज रहे थे, तो कहीं लोग एक कटोरी खिचड़ी के लिए तरस रहे थे. ऐसे मुश्किल दौर में भोग सिर्फ धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि भूख, सामाजिक असमानता और इंसानियत की कहानी भी बन गया.

केरल के पलक्कड़ में रहने वाले पी. बी. मेनन (पूर्ण नाम: पी. बालासुब्रमण्यन मेनन) का जीवन वकालत के प्रति समर्पण और लगन की एक अनोखी मिसाल है. 15 अक्टूबर 1926 को जन्मे मेनन आज 100 वर्ष के हो चुके हैं (या कल हो रहे हैं), फिर भी वे सिविल मामलों की पैरवी करते हुए अदालत में सक्रिय हैं.