15 अगस्त 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने 12वें स्वतंत्रता दिवस भाषण के लिए लाल किला पर खड़े होंगे. मोदी, जिन्होंने लगातार कार्यकाल में इंदिरा गांधी का रिकॉर्ड तोड़कर भारत के दूसरे सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले प्रधानमंत्री बनने का गौरव हासिल किया, ने पिछले 11 वर्षों में देश में व्यापक बदलाव लाए हैं. उनके नेतृत्व में भारत ने न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि वैश्विक मंच पर भी महत्वपूर्ण प्रगति की है.
सपनों को साकार करने की प्रेरणा
पीएम मोदी ने 2022 में स्वतंत्रता सेनानी अल्लूरी सीताराम राजू की 125वीं जयंती समारोह में कहा था, “नया भारत उन स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों का भारत होना चाहिए जिन्होंने हमारी आज़ादी के लिए अपने प्राण न्योछावर किए.” इस दौरान उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि स्वतंत्रता संघर्ष के प्रति जागरूकता बढ़ाना और देशवासियों में उसका सही संदेश पहुंचाना उनके नेतृत्व की प्राथमिकताओं में शामिल है.
इतिहास पर नजर डालें तो 1980 के दशक में उत्तर प्रदेश में दलित राजनीतिक जागरूकता उभर रही थी. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलापति त्रिपाठी ने सुझाव दिया था कि दलित शोषित समाज संघर्ष समिति के प्रभाव को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश में दलित मुख्यमंत्री नियुक्त किया जाए.
गरीब कल्याण योजनाओं पर जोर
मोदी का नेतृत्व भी राजनीतिक और सामाजिक दृष्टिकोण को नई दिशा दे रहा है. उनके कार्यकाल में समावेशी विकास, ऐतिहासिक जागरूकता और हाशिए पर रहे समुदायों के सशक्तिकरण पर जोर दिया गया है. डिजिटल नवाचार, गरीब कल्याण योजनाएँ और सामाजिक समावेशन उनके प्रशासन की प्रमुख विशेषताएं रही हैं.
इस स्वतंत्रता दिवस, प्रधानमंत्री का लाल किला भाषण न केवल राष्ट्रीय गौरव और विकास की कहानी को प्रदर्शित करेगा, बल्कि यह देशवासियों को स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों को साकार करने की दिशा में प्रेरित करेगा. मोदी का यह भाषण भारत के सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक परिवर्तन का प्रतीक भी होगा.
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