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आम आदमी दुर्घटनाओं में जान गंवा रहा है और वीआईपी सुरक्षा पर देश के हजारों करोड़ फूंके जा रहे हैं. आखिर बिना खतरे के नेताओं और बाबाओं को सुरक्षा घेरा क्यों चाहिए? पढ़ें विनीत नारायण का लेख और जानिए इस कड़वे सच के पीछे की पूरी कहानी

पूर्व राजदूत डी.पी.के. श्रीवास्तव की पुस्तक 'फॉरगॉटन कश्मीर' पाकिस्तान नियंत्रित कश्मीर (PoK) के राजनीतिक और सामाजिक जीवन का एक आईना है. यह किताब कश्मीर के विभाजन के बाद वहां की मानवाधिकार स्थिति, पाकिस्तान के कड़े सैन्य नियंत्रण को उजागर करती है.

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने नेग के नाम पर जबरन वसूली को अपराध करार दिया. कोर्ट ने कहा कि परंपरा अपनी जगह, लेकिन डराकर पैसा लेना कानूनन गलत है...

भारत की विदेश नीति में ईरान के साथ संबंध हमेशा अमेरिकी प्रतिबंधों और रणनीतिक स्वायत्तता के बीच झूलते रहे हैं. यदि भारत ने प्रतिबंधों की परवाह किए बिना चाबहार बंदरगाह और उससे जुड़े रेल-रोड नेटवर्क का तेजी से विकास किया होता.

उत्तर प्रदेश में 594 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेसवे बनकर तैयार है. यह नया एक्सप्रेसवे हरदोई, संभल, अमरोहा और बदायूं जैसे 12 'पिछड़े' जिलों की अर्थव्यवस्था, कृषि और रोजगार को नई रफ्तार देने जा रहा है. पढ़ें प्रोफेसर डॉक्टर रीना पाठक का ओपिनियन

AAP के कुल 10 में से 7 राज्यसभा सांसदों (राघव चड्ढा, हरभजन सिंह आदि) ने भाजपा का दामन थाम लिया है पंजाब की भगवंत मान सरकार पर मंडराते खतरे और ED/CBI की भूमिका पर पढ़ें वरिष्ठ पत्रकार विनीत नारायण का यह बेबाक विश्लेषण

भारतीय फोटोग्राफी के दिग्गज रघु राय का 83 वर्ष की आयु में निधन हो गया है. 1965 में अपना करियर शुरू करने वाले राय ने भोपाल गैस त्रासदी से लेकर मदर टेरेसा के पोर्ट्रेट तक, भारत की हर महत्वपूर्ण घटना और संवेदना को अपने कैमरे में कैद किया.

AAP में राघव चड्ढा को लेकर उठे सवालों के बीच जानिए क्यों योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण और कुमार विश्वास जैसे बड़े नेताओं ने पार्टी से दूरी बनाई.

राजीव कुमार का उपन्यास 'जहांआरा: पादशाह बेगम' मुगल शहजादी जहांआरा के त्याग, विद्वत्ता और राजनीतिक कौशल की कहानी है। यह किताब चांदनी चौक की वास्तुकार और सूफी मत की अनुयायी जहांआरा के व्यक्तित्व को एक नए नारीवादी दृष्टिकोण से पेश करती है.

दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट के फैसले में CBI के एक वरिष्ठ अधिकारी को दोषी ठहराए जाने के बाद एजेंसी की विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं. अदालत ने ‘मालाफाइड’ कार्रवाई को गैर-कानूनी माना. अब अनुच्छेद 311 और सीसीएस (सीसीए) नियम 19 के तहत विभागीय कार्रवाई की मांग तेज हो गई है.


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