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Kanya Sumangla Mission Shakti Digital
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ब्लॉग

Indian Civilization - The Zenith & Decline: आईआईटी दिल्ली के स्नातक और यूपीएससी सचिव शशि रंजन कुमार की नई पुस्तक भारतीय सभ्यता के स्वर्णिम काल से लेकर उसके संघर्षों तक का एक निष्पक्ष विश्लेषण पेश करती है.

आज देश की पहली महिला डॉक्टर आनंदीबाई जोशी की जयंती है. 19वीं सदी के रूढ़िवादी समाज की बेड़ियां तोड़कर अमेरिका से मेडिकल डिग्री लेने वाली आनंदीबाई की कहानी आंसू और साहस की मिसाल है.

GDP आधारित विकास मॉडल पर सवाल उठते हुए अब ‘सकल घरेलू उल्लास’ और गांव-केंद्रित अर्थव्यवस्था की चर्चा तेज हो रही है. गौ-आधारित आत्मनिर्भरता और मथुरा मॉडल को भारत के भविष्य के विकल्प के तौर पर पेश किया जा रहा है...

आज भारतीय सिनेमा की नींव रखने वाली महान अभिनेत्री देविका रानी की 118वीं जयंती है. लंदन में पढ़ाई, 'बॉम्बे टॉकीज' की स्थापना और पर्दे पर सामाजिक बेड़ियों को तोड़ने वाली देविका रानी का सफर बेहद साहसी रहा.

विश्व ऊर्जा संकट के कगार पर है. अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध से हॉर्मुज स्ट्रेट बंद, तेल की कीमतें 100 डॉलर के पार चली गईं. भारत में ईंधन-बिजली पर दबाव, ‘ऊर्जा लॉकडाउन’ की आशंका पनपी. उधर, पाकिस्तान ईरान—अमेरिका में मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है.

27 मार्च को दुनिया भर में विश्व रंगमंच दिवस मनाया जा रहा है. इस मौके पर राजकमल प्रकाशन से आई फैसल अलकाजी की किताब 'मंच प्रवेश' चर्चा के केंद्र में है.

अमर शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की 95वीं बरसी पर पंकज चतुर्वेदी की नई किताब ‘मेरे भगत सिंह’ चर्चा में है. यह किताब भगत सिंह को केवल एक क्रांतिकारी नायक के रूप में नहीं, बल्कि लाहौर के उस घर के एक लाडले बेटे और जेल की कोठरी में गहन दर्शन पर बहस करने वाले एक प्रखर विद्वान के रूप में पेश करती है.

आज बिहार अपना स्थापना दिवस मना रहा है. इस अवसर पर पेंगुइन स्वदेश द्वारा प्रकाशित अभय के. की पुस्तक "नालंदा: विश्व चेतना का उद्गम स्थल" के जरिए जानिए उस महान विश्वविद्यालय के उत्थान, पतन और फिर से जीवित होने की पूरी कहानी.

आज विश्व कविता दिवस पर याद करते हैं राजस्थान के उस जनकवि को, जिनकी पंक्तियों में रेगिस्तान की तपन भी है और संवेदना की ठंडी छांव भी. पेंगुइन स्वदेश द्वारा प्रकाशित कन्हैयालाल सेठिया के प्रतिनिधि संग्रह 'पंख दिए आकाश न दोगे' की विशेष समीक्षा, जो हमें स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता की नई उड़ान सिखाती है.

आज 17 मार्च 2026 को राष्ट्रकवि रामावतार त्यागी की 100वीं जयंती है. 'समर्पण' जैसी कालजयी कविता देने वाले त्यागी जी ने पत्रकारिता और बॉलीवुड में भी अपनी छाप छोड़ी. पढ़ें उनकी जीवन यात्रा.


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