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बांग्लादेश में 35 साल बाद पुरुष प्रधानमंत्री: तारिक रहमान का ऐतिहासिक उदय

बांग्लादेश की राजनीति में आज एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है. 13वें संसदीय चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की प्रचंड जीत के बाद तारिक रहमान देश के नए प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं. यह 35 साल में पहली बार है जब किसी पुरुष नेता ने इस पद की कमान संभाली है.

Tarique Rahman Prime Minister
Edited by Vaibhav Gupta

आज बांग्लादेश की राजनीति में एक नया युग शुरू हो गया है. 13वीं संसदीय चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने भारी बहुमत हासिल किया है. पार्टी के चेयरमैन तारिक रहमान अब देश के अगले प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं. यह 35 वर्षों बाद है जब बांग्लादेश को कोई पुरुष प्रधानमंत्री मिल रहा है. आखिरी बार 1991 में खालिदा जिया ने पद संभाला था.

महिलाओं का लंबा प्रभुत्व

1991 से अब तक बांग्लादेश की राजनीति में दो महिलाओं—खालिदा जिया और शेख हसीना—का वर्चस्व रहा है. खालिदा जिया ने 1991-1996 और 2001-2006 तक शासन किया, जबकि शेख हसीना ने 1996-2001 और फिर 2009 से 2024 तक लगातार प्रधानमंत्री रहीं. इस दौरान कोई पुरुष नेता प्रधानमंत्री नहीं बना. 2024 में छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना की सरकार गिर गई और मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार बनी. अब बीएनपी की जीत के साथ यह दौर खत्म हो रहा है.

बीएनपी की भारी जीत

चुनाव में बीएनपी ने 299 सीटों वाली संसद में 209 से अधिक सीटें जीत लीं, जो दो-तिहाई बहुमत से ज्यादा है. कुछ अनौपचारिक परिणामों में बीएनपी को 212 सीटें मिलीं, जबकि जमात-ए-इस्लामी को 70 के आसपास. ढाका और बोगुरा जैसे प्रमुख इलाकों में बीएनपी का दबदबा रहा. तारिक रहमान ने ढाका-17 और बोगुरा-6 दोनों सीटों से जीत हासिल की.

बीएनपी ने चुनाव अभियान में “बांग्लादेश पहले” का नारा दिया और जनता ने बदलाव की मांग को मजबूती से समर्थन दिया.

कौन हैं Tarique Rahman?

तारिक रहमान पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया और पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान के पुत्र हैं. उन्होंने ढाका विश्वविद्यालय से पढ़ाई की और व्यवसाय में भी हाथ आजमाया. 1980 के दशक के अंत में बीएनपी में शामिल हुए और तेजी से ऊपर चढ़े.

2000 के दशक में भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते वे 17 साल लंदन में निर्वासन में रहे. समर्थकों का कहना है कि ये आरोप राजनीतिक थे. 2024 में हसीना सरकार के पतन के बाद सारे मामले खारिज हो गए. दिसंबर 2025 में वे बांग्लादेश लौटे और पार्टी का नेतृत्व संभाला.

भारत-बांग्लादेश संबंधों पर असर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारिक रहमान को बधाई दी और कहा कि उनके साथ काम करने की प्रतीक्षा है. शेख हसीना भारत की शरण में हैं, इसलिए संबंधों में तनाव था. बीएनपी की सत्ता में वापसी से अवामी लीग का प्रभाव कम होगा. तारिक रहमान की राष्ट्रवादी नीतियां सीमा, व्यापार और सुरक्षा पर असर डाल सकती हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह दक्षिण एशिया में नया संतुलन ला सकता है.

नई उम्मीदें

तारिक रहमान का प्रधानमंत्री बनना बांग्लादेश के लिए लोकतंत्र की बहाली, आर्थिक सुधार और स्थिरता का संकेत है.

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-भारत एक्सप्रेस



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