जानिए दुनिया में क्यों है इतना अंतर?
Cheapest Petrol In World: आप सोचिए अगर आप बाइक लेकर पेट्रोल पंप गए और कर्मचारी ने कहा कि एक लीटर का सिर्फ 3 रुपये लगेगा. आपको लगेगा मजाक कर रहा है, लेकिन ये सच है. दुनिया में कई ऐसी जगहें हैं जहां पेट्रोल पानी से भी सस्ता मिलता है तो वहीं कुछ जगहों पर एक लीटर भरवाने के लिए जेब ढीली करनी पड़ती है.
भारत में अलग-अलग कीमत
हमारे देश में भी हर शहर में पेट्रोल का रेट अलग होता है. अंडमान के पोर्ट ब्लेयर में आप जाएंगे तो वहां पेट्रोल काफी सस्ता मिलेगा, जबकि राजस्थान या महाराष्ट्र में वही पेट्रोल 10-15 रुपये ज्यादा में बिकता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हर राज्य अपना टैक्स अलग लगाता है.
फिर देश-दुनिया में इतना अंतर क्यों?
अब मन में सवाल आएगा कि कच्चा तेल तो सभी देश लगभग एक ही भाव पर बाहर से खरीदते हैं फिर पेट्रोल पंप पर दाम में जमीन-आसमान का फर्क कैसे? इसका पूरा खेल सरकार के टैक्स और दी जाने वाली छूट पर टिका है.
सरकार देती है बड़ी सब्सिडी
वेनेजुएला, ईरान, लीबिया जैसे देशों को देख लीजिए. यहां पेट्रोल की कीमत 2 से 4 रुपये प्रति लीटर के बीच ही घूमती है. वजह साफ है, वहां की सरकारें चाहती हैं कि लोगों को सस्ता ईंधन मिले. इसलिए पेट्रोल की जो असली लागत आती है उसका बड़ा हिस्सा सरकार खुद उठा लेती है और जनता को सब्सिडी पर देती है. इन देशों में तेल का उत्पादन भी खूब होता है.
हांगकांग में कैसे मिलता है पेट्रॉल?
इसके बिल्कुल उलट हांगकांग जैसे देशों का हाल है. यहां एक लीटर पेट्रोल के लिए आपको 400 रुपये से भी ज्यादा चुकाने पड़ सकते हैं. यहां सरकार पेट्रोल पर बहुत ज्यादा टैक्स वसूलती है. और टैक्स लगाने के पीछे सिर्फ कमाई ही नहीं है. सरकार चाहती है कि लोग अपनी कार कम चलाएं, बस और मेट्रो का ज्यादा इस्तेमाल करें, ताकि सड़कों पर जाम और हवा में धुआं दोनों कम हो.
अमेरिका का क्या है सीन?
अमेरिका में पेट्रोल को लोग गैसोलीन बोलते हैं. वहां लीटर का हिसाब नहीं चलता, गैलन में तेल बिकता है. एक गैलन मतलब करीब पौने चार लीटर. अमेरिका खुद ही दुनिया में सबसे ज्यादा कच्चा तेल निकालने वाले देशों में से एक है, इसलिए वहां लंबे समय तक पेट्रोल सस्ता रहा है. पर जब दुनिया में तेल महंगा होता है तो अमेरिका भी इससे बच नहीं पाता. वहां भी कैलिफोर्निया जैसे राज्यों में गैसोलीन बहुत महंगा है, जबकि टेक्सास में सस्ता है.
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असली फॉर्मूला क्या है?
कुल मिलाकर बात ये है कि पेट्रोल का भाव सिर्फ कच्चे तेल से नहीं बनता. उसमें सरकार कितना टैक्स ले रही है, कितनी सब्सिडी दे रही है, तेल को लाने में कितना खर्च लगा और वहां की लोकल पॉलिसी क्या है, ये सब मिलकर तय करता है कि आपको एक लीटर के लिए 3 रुपये देने होंगे या 400 रुपये.
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-भारत एक्सप्रेस
(यह खबर सान्या सिंह द्वारा लिखी गई है.)
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