Bharat Express DD Free Dish
Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital
Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital

भारत का स्वदेशीकरण पर जोर, 2015 से रक्षा उत्पादन 2.6 गुना बढ़ा

2023-24 में रक्षा उत्पादन 1.27 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया था. सरकार को उम्मीद है कि यह इस वित्त वर्ष में 1.6 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचेगा. 2019-20 और 2023-24 के बीच रक्षा उत्पादन में 12 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर से वृद्धि हुई.

प्रतीकात्मक तस्वीर. (फोटो: IANS)

सशस्त्र बलों के लिए रक्षा उपकरणों में आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत के प्रयासों का नतीजा अब साफ-साफ दिखने लगा है. पिछले एक दशक में रक्षा उत्पादन में दो अंकों की वृद्धि हुई है, जो वित्त वर्ष 2015 के 46,429 करोड़ रुपये से दोगुना से भी अधिक है.

मनीकंट्रोल के विश्लेषण से पता चलता है कि महामारी के बाद विकास की गति और बढ़ गई है, क्योंकि देश ने 2029 तक 3 लाख करोड़ रुपये के रक्षा उत्पादन का लक्ष्य रखा है.

उत्पादन 1.6 लाख करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद

2023-24 में रक्षा उत्पादन 1.27 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया था. सरकार को उम्मीद है कि यह इस वित्त वर्ष में 1.6 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचेगा. 2019-20 और 2023-24 के बीच रक्षा उत्पादन में 12 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर से वृद्धि हुई, जबकि सरकार के पहले कार्यकाल में 11.2 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई थी.

15 जनवरी को, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वदेशी रूप से विकसित और डिज़ाइन किए गए तीन प्रमुख नौसैनिक लड़ाकू जहाजों को कमीशन किया. आईएनएस सूरत में तीन-चौथाई सामग्री स्वदेशी स्रोतों से ली गई है, जबकि आईएनएस नीलगिरी को भारतीय नौसेना के युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो द्वारा डिजाइन किया गया है.

भारत रक्षा निर्यातक भी बन रहा है.

सरकार ने इस साल अप्रैल में उल्लेख किया था कि भारत का रक्षा निर्यात वित्त वर्ष 24 में 21,083 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष से 33 प्रतिशत अधिक है. वित्त वर्ष 2015 के बाद से रक्षा निर्यात में लगभग 10 गुना वृद्धि हुई है, जब यह केवल 1,900 करोड़ रुपये था. दो दशकों यानी 2004-05 से 2013-14 और 2014-15 से 2023-24 की अवधि का तुलनात्मक डेटा बताता है कि रक्षा निर्यात में 21 गुना वृद्धि हुई है. 2004-05 से 2013-14 के दौरान कुल रक्षा निर्यात 4,312 करोड़ रुपये था, जो 2014-15 से 2023-24 की अवधि में बढ़कर 88,319 करोड़ रुपये हो गया है.

PSU  का दबदबा

विश्लेषण से पता चलता है कि निजी क्षेत्र की भागीदारी अभी भी इस क्षेत्र में बढ़नी बाकी है. रक्षा मंत्रालय के डैशबोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, 2016-17 से रक्षा उत्पादन में निजी रक्षा फर्मों की हिस्सेदारी 19-21 प्रतिशत के बीच अपरिवर्तित बनी हुई है. इसके बजाय, इस अवधि के दौरान पुराने रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की हिस्सेदारी बढ़ी है. 2016-17 में पुराने पीएसयू (PSU) की हिस्सेदारी कुल उत्पादन में 54.6 प्रतिशत थी, जो 2023-24 तक बढ़कर 58.4 प्रतिशत हो गई.

इस अवधि के दौरान नए रक्षा पीएसयू की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत से घटकर 15.3 प्रतिशत हो गई.


ये भी पढ़ें: भारत दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम, 500 से बढ़कर 1.5 लाख पार हुई Startup की संख्या


-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital