Share Market Update 2025: अगर आप पिछले कुछ दिनों से न्यूज़ हेडलाइंस देख रहे हैं, तो आपको लग रहा होगा कि शेयर बाजार में तो बल्ले-बल्ले चल रही है. सेंसेक्स और निफ्टी लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं. सेंसेक्स इस साल करीब 9.5% और निफ्टी 11% तक चढ़ चुका है. लेकिन, ज़रा रुकिए! अपनी ब्रोकिंग ऐप खोलिए और अपना पोर्टफोलियो चेक कीजिए. क्या वहां भी वैसी ही हरियाली है जैसी हेडलाइंस में दिख रही है?मुमकिन है कि जवाब ‘ना’ हो.
दरअसल, 2025 का यह शेयर बाजार एक ऐसे पहाड़ जैसा है जिसकी चोटी तो चमक रही है, लेकिन उसकी नींव दरक रही है. ऊपर से देखने पर सब चकाचक है, मगर हकीकत यह है कि बाजार की यह तेजी ‘खोखली’ साबित हो रही है.
आंकड़ों का डरावना सच
बाजार के जानकारों ने जब आंकड़ों की गहराई में गोता लगाया, तो चौंकाने वाली बात सामने आई. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर लिस्टेड कुल 2,667 शेयरों में से लगभग 89% यानी 2,372 शेयर अपने एक साल के सबसे ऊंचे स्तर से बुरी तरह टूट चुके हैं.
हालात इतने खराब हैं कि 1,532 शेयर अपने हाई से 20% से 50% तक नीचे गिर चुके हैं. करीब 400 शेयर तो ऐसे हैं जो आधे से ज्यादा (50% से 75%) साफ हो चुके हैं. यानी बाजार की पूरी की पूरी रौनक सिर्फ मुट्ठी भर, यानी महज 11% बड़े शेयरों के दम पर टिकी है. बाकी पूरा बाजार मंदी की गिरफ्त में है.
क्यों आई यह नौबत?
अब सवाल उठता है कि जब कुछ शेयर भाग रहे हैं, तो बाकी क्यों गिर रहे हैं? इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है रिटेल यानी छोटे निवेशकों और बड़े अमीर निवेशकों (HNI) का बाजार से हाथ खींच लेना. पिछले कुछ सालों में जो स्मॉलकैप और मिडकैप शेयर रॉकेट बने हुए थे, उन्हें छोटे निवेशकों का ही सहारा था. अब जब रिटेल निवेशकों ने दूरी बनाई, तो इन शेयरों के खरीदार गायब हो गए.
वहीं दूसरी ओर, विदेशी निवेशक (FIIs) लगातार पैसा निकाल रहे हैं. रही-सही कसर डोमेस्टिक म्यूचुअल फंड्स ने पूरी कर दी, जिनका पूरा ध्यान सिर्फ बड़ी और सुरक्षित कंपनियों (लार्जकैप) पर है. नतीजा यह हुआ कि सेंसेक्स तो ऊपर चला गया, लेकिन आम आदमी के निवेश वाले छोटे शेयर धड़ाम हो गए.
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क्या 2026 में लौटेगी रौनक?
शेयर मार्केट एक्सपर्ट पंकज राय का कहना है कि ग्राउंड रियलिटी काफी चुनौतीपूर्ण है. बाजार की ‘ब्रेड्थ’ यानी चौड़ाई बहुत खराब है. जब तक तेजी कुछ ही शेयरों तक सीमित रहेगी, तब तक इसे स्वस्थ बाजार नहीं माना जा सकता.
हालांकि, उम्मीद की एक किरण 2026 में दिख रही है. अगर भारत और अमेरिका के बीच कोई बड़ा व्यापारिक समझौता होता है, तो रुपया मजबूत होगा और विदेशी पैसा वापस लौट सकता है. साथ ही, बजट में GST कटौती जैसे फैसलों और कंपनियों की कमाई में सुधार से बाजार की सूरत बदल सकती है.
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-भारत एक्सप्रेस
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