Meta Layoffs 2026: टेक जगत से एक बार फिर निराश करने वाली खबर आ रही है. फेसबुक और इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी मेटा ने वैश्विक स्तर पर बड़े पैमाने पर छंटनी करने का फैसला किया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी इस बार करीब 8,000 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाने जा रही है. हैरानी की बात यह है कि इस बार छंटनी की मुख्य वजह मंदी नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) है. कंपनी एआई तकनीक को अपनाने के लिए अपने पूरे ऑर्गेनाइजेशन का पुनर्गठन कर रही है.
मेटा ने प्रभावित होने वाले कर्मचारियों को धीरे-धीरे छंटनी का नोटिस भेजना भी शुरू कर दिया है. माना जा रहा है कि इस फैसले से मेटा के कुल वर्कफोर्स का लगभग 10 फीसदी हिस्सा प्रभावित होगा और कई लोगों के रोल बदल दिए जाएंगे.
7,000 कर्मचारियों को मिलेगी नई जिम्मेदारी
कंपनी के एक इंटरनल मेमो से यह बात सामने आई है कि पूरी तरह नौकरी से निकालने के अलावा मेटा अपने करीब 7,000 मौजूदा कर्मचारियों को AI-focused नई भूमिकाओं में ट्रांसफर करने की तैयारी में है.
कर्मचारियों को भेजे गए एक संदेश में मेटा की एचआर चीफ जेनेल गेल ने साफ किया कि कई टीमों को एआई-आधारित सिद्धांतों के तहत दोबारा री-डिजाइन किया जा रहा है. इसका मकसद कंपनी के स्ट्रक्चर को बेहद सरल और छोटा बनाना है ताकि छोटे ग्रुप्स ज्यादा जिम्मेदारी के साथ और तेजी से काम खत्म कर सकें. उन्होंने कहा कि भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए टीमों में एआई-आधारित डिजाइन को शामिल करना अब जरूरी हो गया है.
कर्मचारियों को ‘वर्क फ्रॉम होम’ करने को कहा
मेटा का छंटनी करने का तरीका इस बार भी पुराना ही रहा. रिपोर्ट के अनुसार जिस दिन छंटनी की घोषणा होनी थी, उस दिन उत्तरी अमेरिका के सभी कर्मचारियों को दफ्तर आने के बजाय घर से ही काम करने के लिए कह दिया गया था. कंपनी ने अपनी पिछली छंटनी के दौरान भी इसी प्रक्रिया को अपनाया था ताकि ऑफिस में किसी तरह की अफरा-तफरी न मचे.
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AI पर पानी की तरह पैसा बहा रही है कंपनी
मेटा का यह कदम ऐसे समय में आया है जब कंपनी एआई इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए पानी की तरह पैसा बहा रही है. कंपनी ने साल 2026 के लिए अपना कैपिटल एक्सपेंडिचर 125 अरब डॉलर से लेकर 145 अरब डॉलर के बीच रहने का अनुमान लगाया है. यह भारी-भरकम बजट मुख्य रूप से एआई डेटा सेंटर बनाने, खुद के कस्टम चिप्स तैयार करने और बड़े एआई मॉडल्स की ट्रेनिंग पर खर्च किया जा रहा है.
इस बीच कर्मचारियों के मन में उठ रहे प्राइवेसी के सवालों पर सीईओ मार्क जकरबर्ग ने भरोसा देते हुए कहा है कि जो भी डेटा इकट्ठा किया जा रहा है, उसका एकमात्र मकसद एआई सिस्टम को एडवांस और बेहतर बनाना है, न कि किसी की जासूसी या निगरानी करना.
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