स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR
SIR Deadline Extension in Six States: चुनाव आयोग ने यूपी, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ समेत 5 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR की समयसीमा बढ़ा दी है. यह फैसला वोटर लिस्ट को बेहतर बनाने के लिए लिया गया है. पहले SIR की आखिरी तारीख 11 दिसंबर थी. अब 5 राज्यों में इसे एक हफ्ते के लिए बढ़ाया गया है. उत्तर प्रदेश में इसे 31 दिसंबर तक कर दिया गया है. इन राज्यों में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और अंडमान निकोबार शामिल हैं.
चुनाव आयोग का कहना है कि इससे ज्यादा लोगों को वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने का मौका मिलेगा. अपडेटेड वोटर लिस्ट अब 19 नवंबर को जारी होगी. इससे पहले केरल में भी समयसीमा 11 दिसंबर से बढ़ाकर 18 दिसंबर की गई थी.
SIR की डेडलाइन- हाल में हुए बदलाव
30 नवंबर को चुनाव आयोग ने SIR की डेडलाइन 7 दिन बढ़ाने का ऐलान किया था. अब मतदाता जोड़ने और हटाने का काम 11 दिसंबर तक चलेगा. पहले यह 4 दिसंबर तक था. ड्राफ्ट लिस्ट पहले 9 दिसंबर को आने वाली थी, लेकिन अब 16 दिसंबर को जारी होगी. अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी 2026 को प्रकाशित की जाएगी. यह बदलाव इसलिए किया गया क्योंकि कई जगहों पर काम पूरा नहीं हो पाया था. राजनीतिक पार्टियों को भी इससे फायदा होगा क्योंकि वे वोटर लिस्ट की जांच कर सकेंगी.
पार्टियों को मिलेगी वोटरों की ये लिस्ट
चुनाव आयोग ने कहा है कि 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR के दौरान राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट्स को मृत, स्थानांतरित और अनुपस्थित वोटरों की सूची दी जाएगी. यह सूची ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने से पहले मिलेगी. ड्राफ्ट लिस्ट 16 दिसंबर को आएगी. मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि हर बूथ के हिसाब से अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लीकेट वोटरों की लिस्ट तैयार करें. ये वे वोटर हैं जिनसे बूथ लेवल ऑफिसर तीन बार कोशिश के बाद भी संपर्क नहीं कर सके. बिहार में SIR के दौरान भी यही तरीका अपनाया गया था. इससे वोटर लिस्ट साफ-सुथरी बनेगी.
SIR आखिर है क्या?
SIR चुनाव आयोग की एक विशेष प्रक्रिया है. इसमें वोटर लिस्ट को अपडेट किया जाता है. 18 साल से ज्यादा उम्र के नए लोगों को वोटर लिस्ट में जोड़ा जाता है. जिन लोगों की मौत हो चुकी है या जो जगह बदल चुके हैं, उनके नाम हटाए जाते हैं. नाम या पते में गलतियां ठीक की जाती हैं. बूथ लेवल ऑफिसर घर-घर जाकर फॉर्म भरवाते हैं. यह काम वोटर लिस्ट को सही और अपडेट रखने के लिए जरूरी है.
सबसे पहले कहां हुआ था SIR?
SIR का पहला चरण बिहार में हुआ था. वहां फाइनल लिस्ट में 7.42 करोड़ वोटर हैं. अब 12 राज्यों में यह प्रक्रिया चल रही है. इनमें करीब 51 करोड़ मतदाता हैं. इस काम के लिए 5.33 लाख बूथ लेवल ऑफिसर और 7 लाख से ज्यादा बूथ लेवल एजेंट लगाए गए हैं. राजनीतिक दल अपने एजेंट भेजते हैं ताकि प्रक्रिया पारदर्शी रहे.
इन राज्यों में कब होंगे चुनाव?
SIR वाले राज्यों में विधानसभा चुनाव कब होंगे, इस बारे में अभी स्पष्ट जानकारी नहीं है. लेकिन SIR का मकसद है कि चुनाव से पहले वोटर लिस्ट पूरी तरह तैयार हो. इससे चुनाव निष्पक्ष और सही तरीके से हो सकेंगे.
वोटर को क्या करना होगा?
SIR के दौरान बूथ लेवल ऑफिसर और एजेंट वोटरों के पास फॉर्म लेकर आएंगे. वोटर को अपनी जानकारी मैच करानी होगी. अगर नाम दो जगहों पर है, तो एक जगह से हटवाना होगा. अगर नाम लिस्ट में नहीं है, तो फॉर्म भरकर डॉक्यूमेंट्स जमा करने होंगे. इससे वोटर लिस्ट में कोई गड़बड़ी नहीं रहेगी.
कौन-से दस्तावेज चलेंगे?
SIR में नाम जुड़वाने या बदलने के लिए कई दस्तावेज मान्य हैं. इनमें पेंशनर पहचान पत्र, सरकारी विभाग का आईडी कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, 10वीं की मार्कशीट, स्थायी निवास प्रमाण पत्र, वन अधिकार प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, राष्ट्रीय रजिस्टर में नाम, परिवार रजिस्टर में नाम, जमीन या मकान आवंटन पत्र और आधार कार्ड शामिल हैं. आधार कार्ड को पहचान के लिए मान्य किया गया है, लेकिन नागरिकता के लिए नहीं.
SIR का मुख्य उद्देश्य
SIR का मुख्य मकसद है कि 1951 से 2004 तक का रिवीजन हो चुका है, लेकिन पिछले 21 सालों में कई बदलाव जरूरी हैं. लोग जगह बदलते हैं, मौत होती है, लेकिन नाम लिस्ट में रह जाते हैं. विदेशी नागरिकों के नाम हटाने भी जरूरी हैं. कोई योग्य वोटर छूट न जाए और कोई अयोग्य शामिल न हो. इससे चुनाव प्रक्रिया मजबूत बनेगी.
नाम कट गया तो क्या करें?
अगर नाम सूची से कट गया है, तो ड्राफ्ट मतदाता सूची के आधार पर एक महीने तक अपील कर सकते हैं. ईआरओ के फैसले के खिलाफ डीएम और डीएम के फैसले के खिलाफ सीईओ तक अपील की जा सकती है.
मदद या शिकायत कहां करें?
शिकायत या मदद के लिए हेल्पलाइन 1950 पर कॉल करें. अपने बूथ लेवल ऑफिसर या जिला चुनाव कार्यालय से संपर्क करें.
बिहार की लिस्ट भी चलेगी
अगर कोई व्यक्ति 12 राज्यों में से किसी में नाम जुड़वाना चाहता है और बिहार की SIR के बाद की सूची दिखाता है, जिसमें उसके माता-पिता के नाम हैं, तो नागरिकता का अतिरिक्त प्रमाण नहीं देना होगा. सिर्फ जन्मतिथि का प्रमाण काफी होगा.
आधार कार्ड की मान्यता
सितंबर में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद चुनाव आयोग ने आधार कार्ड को पहचान के अतिरिक्त दस्तावेज के रूप में मान्य किया है. लेकिन यह नागरिकता प्रमाण नहीं माना जाएगा. यह SIR प्रक्रिया देश की चुनाव व्यवस्था को मजबूत बनाने का एक बड़ा कदम है. इससे वोटर लिस्ट सही रहेगी और चुनाव निष्पक्ष होंगे.
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