Fact Check: पश्चिम बंगाल में बीजेपी सरकार बनने के बाद भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़बंदी का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है. इसी बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें सुरक्षाबल के जवानों को हथियार ताने देखा जा सकता है. कई यूजर्स ने इसे शेयर कर दावा किया कि यह बांग्लादेश सीमा का दृश्य है और सुरक्षाकर्मी मुसलमानों को गोली मारने की धमकी दे रहे हैं.
जांच में निकला सच
भारत एक्सप्रेस न्यूज ने इस वीडियो की पड़ताल की तो पता चला कि यह वीडियो भारत-बांग्लादेश सीमा का नहीं बल्कि नेपाल का है. फरवरी 2026 में नेपाल के तनाहु जिले में हुए एक मॉक ड्रिल का वीडियो सोशल मीडिया पर गलत दावे के साथ फैलाया जा रहा है.
कैसे हुई पड़ताल?
वीडियो के कीफ्रेम निकालकर गूगल लेंस से सर्च किया गया. नेपाल की एक न्यूज वेबसाइट पर छपी खबर में यही कीफ्रेम मिला. गूगल ट्रांसलेट से अनुवाद करने पर पता चला कि यह वीडियो संसदीय चुनाव से पहले सुरक्षा एजेंसियों के संयुक्त अभ्यास का हिस्सा था.
आधिकारिक पोस्ट से पुष्टि
एक फेसबुक अकाउंट से 9 फरवरी 2026 को इस अभ्यास की तस्वीरें पोस्ट की गई थीं. इनमें वायरल वीडियो का कीफ्रेम भी मौजूद है. पोस्ट के मुताबिक, 21 फरवरी को होने वाले चुनाव को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष बनाने के लिए यह अभ्यास कराया गया था.
बंगाल में बाड़बंदी का फैसला
वहीं पश्चिम बंगाल में बीजेपी सरकार बनने के बाद पहली कैबिनेट बैठक में बांग्लादेश सीमा पर बाड़ और चौकियां बनाने के लिए जमीन देने का फैसला लिया गया. ‘ऑल इंडिया रेडियो’ की रिपोर्ट के अनुसार, शुभेंदु सरकार ने बीएसएफ को 142.79 एकड़ जमीन सौंप दी है. बंगाल की 2,217 किलोमीटर लंबी सीमा में से करीब 1,600 किलोमीटर पर पहले ही बाड़ लगी है, अब लगभग 600 किलोमीटर हिस्से पर काम बाकी है.
फेक पोस्ट का इतिहास
वायरल वीडियो शेयर करने वाले फेसबुक यूजर की प्रोफाइल स्कैन करने पर पता चला कि वह उत्तर प्रदेश के कुशीनगर का रहने वाला है और पहले भी कई भ्रामक पोस्ट शेयर कर चुका है. उसके करीब 27 हजार फॉलोअर्स हैं और वह एक खास विचारधारा से प्रभावित दिखता है.
स्पष्ट है कि नेपाल के मॉक ड्रिल का वीडियो भारत-बांग्लादेश सीमा का बताकर गलत दावे के साथ फैलाया गया. असलियत यह है कि बंगाल में बाड़बंदी का काम तो चल रहा है लेकिन वायरल वीडियो उससे जुड़ा नहीं है.
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-भारत एक्सप्रेस
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