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क्या असम के चाय बागान में पीएम मोदी का फोटो ‘सेट’ लगाकर खींचा गया? जानें सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीर का पूरा सच

असम के चाय बागानों में पीएम मोदी की एक फोटो को ‘स्टेज्ड’ बताकर वायरल किया जा रहा है. हमारी फैक्ट चेक रिपोर्ट में सामने आया है कि ये फोटो पूरी तरह से एआई-निर्मित और फर्जी है.

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असम विधानसभा चुनाव 2026 की सरगर्मियों के बीच सोशल मीडिया पर दावों और विवादों का दौर भी तेज हो गया है. हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी असम के डिब्रूगढ़ दौरे पर थे, जहां उन्होंने चाय बागानों का दौरा किया और महिला श्रमिकों के साथ बातचीत की. इसी दौरे से जुड़ी एक तस्वीर इंटरनेट पर आग की तरह फैल रही है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि पीएम मोदी का ये पूरा कार्यक्रम ‘प्री-प्लान्ड’ या ‘स्टेज्ड’ था. वायरल फोटो में भारी-भरकम कैमरे, बड़ी लाइट्स और क्रू मेंबर्स नजर आ रहे हैं, जिससे ऐसा लग रहा है जैसे किसी फिल्म की शूटिंग चल रही हो. लेकिन क्या ये वाकई में सच है. आइए जानेत है.

विपक्ष ने साधा निशाना

PM Modi ने खुद अपने सोशल मीडिया हैंडल पर चाय बागान की तस्वीरें साझा की थीं, जिसमें वे पारंपरिक असमिया पोशाक में महिला मजदूरों के साथ चाय की पत्तियां तोड़ते नजर आ रहे थे. उन्होंने इसे एक यादगार अनुभव बताया था.

हालांकि, इसके तुरंत बाद एक दूसरी तस्वीर वायरल होने लगी, जिसे विपक्षी नेताओं और कई सोशल मीडिया यूजर्स ने हथियार बना लिया. पूर्व क्रिकेटर और तृणमूल कांग्रेस के सांसद कीर्ति आजाद ने इस फोटो को शेयर करते हुए तंज कसा कि पीएम मोदी ने एक्टिंग के मामले में अमिताभ बच्चन और रजनीकांत को भी पीछे छोड़ दिया है.

उन्होंने दावा किया कि ये कोई अचानक हुई मुलाकात नहीं बल्कि करोड़ों रुपये खर्च करके तैयार किया गया एक ‘सेट’ था.

पड़ताल में खुली पोल

जब इस वायरल तस्वीर की बारीकी से जांच की गई, तो इसमें कई ऐसी खामियां मिलीं जो आम तौर पर ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI) द्वारा बनाई गई तस्वीरों में होती हैं. फोटो को जूम करने पर पीछे लगे बोर्ड्स पर लिखा टेक्स्ट पढ़ा नहीं जा सकता और वह पूरी तरह से विकृत (Distorted) नजर आता है. साथ ही, तस्वीर में लाइटिंग की स्थिति और लोगों के चेहरों के आसपास की धुंधलाहट भी काफी अस्वाभाविक है.

इसी क्रम में जब हमने गूगल के ‘SynthID’ टूल और अन्य एआई डिटेक्शन टूल्स का सहारा लिया, तो सच्चाई सामने आ गई. इन हाई-टेक टूल्स ने पुष्टि की कि ये तस्वीर 99.9% एआई-जनरेटेड है. यानी किसी ने शरारतपूर्ण तरीके से एआई का इस्तेमाल करके ये फर्जी दृश्य तैयार किया ताकि ऐसा लगे कि पीएम मोदी का दौरा सिर्फ एक फोटो शूट था. असल में, ऐसी कोई ‘बिहाइंड द सीन्स’ लोकेशन वहां मौजूद ही नहीं थी.

चुनाव के समय भ्रामक खबरों से रहें सावधान

असम में 9 अप्रैल को मतदान होना है और 4 मई को नतीजे आएंगे. चुनाव के इतने करीब इस तरह की फर्जी तस्वीरों का वायरल होना मतदाताओं को प्रभावित करने की एक सोची-समझी कोशिश हो सकती है. इसलिए सोशल मीडिया पर दिखने वाली हर चमकती चीज को सच न मानें. किसी भी विवादित फोटो या वीडियो को शेयर करने से पहले उसकी प्रमाणिकता की जांच जरूर करें. फिलहाल, इस पड़ताल से ये साफ है कि वायरल हो रही ‘शूटिंग’ वाली फोटो पूरी तरह से फर्जी है.

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-भारत एक्सप्रेस



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