हिंद की चादर, त्याग और बलिदान के प्रतीक श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी का 350वां शहीदी दिवस आज पूरे सम्मान और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है. दिल्ली के लाल किला मैदान में शबद-कीर्तन, भंडारे और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी. इस कार्यक्रम में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह (Amit Shah), दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता , और पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा भी शामिल हुए.
लाल किले प्रांगण में गूंजी शबद वाणी
लाल किले का ऐतिहासिक मैदान आज भक्ति और श्रद्धा से सरोबार दिखाई दिया. 350वें शहीदी दिवस के मौके पर गुरु महाराज की याद में शबद-कीर्तन और विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जहां सुबह से ही संगतें पहुंचनी शुरू हो गईं. श्री गुरु तेग बहादुर जी के शहीदी दिवस के उपलक्ष्य में गुरुद्वारा श्री सीस गंज साहिब से लेकर लाल किला मैदान तक कई पवित्र कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. पहले ही आगरा से पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूप की शानदार शोभायात्रा निकाली जा चुकी है, जिसने पूरे मार्ग को गुरुबाणीमय कर दिया.
हजारों श्रद्धालुओं ने लिया भाग
श्रद्धा और सम्मान का नजारा तब और गहरा हो गया जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Union Minister Amit Shah) कार्यक्रम में पहुंचे. उन्होंने गुरु ग्रंथ साहिब को माथा टेका और गुरु तेग बहादुर साहिब जी को श्रद्धांजलि अर्पित की. गृह मंत्री ने कहा कि गुरु तेग बहादुर की शहादत मानवता और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा का सर्वोच्च उदाहरण है.
साल भर होंगे गुरु तेग बहादुर के कार्यक्रम
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी का बलिदान पूरे विश्व के लिए मार्गदर्शक है. आज हम उनके आदर्शों को नमन करते हैं. दिल्ली सरकार पूरे साल अलग-अलग कार्यक्रमों के जरिए गुरु तेग बहादुर जी की शहादत और उनके संदेशों को युवा पीढ़ी तक पहुंचाएगी.
350वें शहीदी दिवस को लेकर लोगों में संशय था. लेकिन गृह मंत्री अमित शाह जी ने भरोसा दिलाया कि कार्यक्रम पूरी सुरक्षा और सम्मान के साथ होगा और आज वही हो रहा है.
गुरु तेग बहादुर का साहित्य बांटा गया
इस मौके पर साहित्यकार एम. पी. सिंह ने बताया कि इतिहास गवाह है, गुरु तेग बहादुर साहिब को शहीद करने वालों का आज कोई नामोनिशान नहीं है. लेकिन लाल किले जैसे ऐतिहासिक स्थल पर गुरु महाराज की 350वीं शहादत का स्मरण किया जाना, उनके त्याग की अमरता को दर्शाता है. गुरु को शहीद करने वाले इतिहास में कहीं नहीं लेकिन आज लाल किला उनके अमर बलिदान का साक्षी बन रहा है.
लाल किला बना आयोजन का साक्षी
हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी गुरु महाराज दे जयकारे की गूंज और शबद-कीर्तन की स्वर लहरियों ने लाल किले के मैदान को एक धार्मिक और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया. लाल किला मैदान से गुरुबाणी की गूंज, संगत की आस्था और गुरु तेग बहादुर साहिब के प्रति अटूट श्रद्धा 350वां शहीदी दिवस न सिर्फ गुरु महाराज के बलिदान का स्मरण है, बल्कि यह संदेश भी कि सत्य और धर्म की रक्षा के लिए दिया गया त्याग कभी व्यर्थ नहीं जाता.
-भारत एक्सप्रेस
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