देश की आजादी के लिए हंसते-हंसते अपने प्राणों की आहुति देने वाले सबसे कम उम्र के महान क्रांतिकारी खुदीराम बोस के बलिदान दिवस (11 अगस्त) पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने उन्हें कोटि-कोटि नमन किया. गृह मंत्री ने कहा कि खुदीराम बोस का जीवन, उनका अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान युगों-युगों तक देश के युवाओं को राष्ट्रसेवा और देशभक्ति की प्रेरणा देता रहेगा.
‘अल्पायु में ही हिला दी थी ब्रिटिश हुकूमत की नींव’
अमित शाह ने महान स्वतंत्रता सेनानी को याद करते हुए कहा कि मां भारती को गुलामी की जंजीरों से आजाद कराने के लिए खुदीराम बोस ने बहुत ही छोटी उम्र में सशस्त्र क्रांति का बिगुल फूंक दिया था. उन्होंने अपने शौर्य, निडरता और अभूतपूर्व त्याग से उस समय के शक्तिशाली ब्रिटिश साम्राज्य की जड़ों को हिलाकर रख दिया था.
महान क्रांतिकारी खुदीराम बोस जी के बलिदान दिवस पर उन्हें कोटि-कोटि नमन।
माँ भारती को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराने के लिए खुदीराम बोस जी ने अल्पायु में ही सशस्त्र क्रांति का उद्घोष किया और अपने साहस, शौर्य व त्याग से ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिला दी। मात्र 18 वर्ष की आयु… pic.twitter.com/XJn9D8BYxd
— Amit Shah (@AmitShah) August 11, 2026
मात्र 18 साल की उम्र में, जब युवा अपने भविष्य के सपने बुनते हैं, तब खुदीराम बोस ने चेहरे पर मुस्कान लिए फांसी के फंदे को चूम लिया था. उनके इस बलिदान ने देश के स्वतंत्रता संग्राम को एक नई दिशा और असीम ऊर्जा दी.
युवाओं के लिए सदा अमर रहेगी राष्ट्रभक्ति की गाथा
गृह मंत्री ने रेखांकित किया कि खुदीराम बोस जी का त्याग केवल इतिहास का एक पन्ना नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति और स्वाभिमान का एक ऐसा अमर अध्याय है, जो आने वाली पीढ़ियों के दिलों में हमेशा राष्ट्रसेवा की अलख जगाता रहेगा. देश उनके इस ऐतिहासिक योगदान को कभी नहीं भूल सकता.
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-भारत एक्सप्रेस
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