देश में बढ़ती नशे की समस्या और मादक पदार्थों की तस्करी पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है. केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में आयोजित होने वाली नार्को-कोऑर्डिनेशन सेंटर (NCORD) की 10वीं शीर्ष-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करेंगे. इस अहम बैठक को देशभर में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) की ओर से आयोजित इस बैठक में केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल तथा नशे के कारोबार पर प्रभावी कार्रवाई की रणनीति पर चर्चा होगी. बैठक हाइब्रिड मोड में आयोजित की जाएगी, जिसमें 44 केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के प्रतिनिधियों के अलावा विभिन्न राज्यों और ड्रग कानून प्रवर्तन एजेंसियों के कुल 108 अधिकारी हिस्सा लेंगे.
अगले तीन वर्षों की रणनीति होगी तय
बैठक के दौरान अमित शाह “मादक पदार्थ नियंत्रण पर विज़न डॉक्यूमेंट 2026-2029” जारी करेंगे. इस दस्तावेज़ को तैयार करने से पहले विभिन्न सरकारी विभागों, कानून प्रवर्तन एजेंसियों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया गया है.
इस विज़न डॉक्यूमेंट का उद्देश्य केवल नशीले पदार्थों की सप्लाई रोकना ही नहीं है, बल्कि युवाओं को नशे से दूर रखना, नशे के शिकार लोगों के इलाज और पुनर्वास की सुविधाओं को मजबूत करना और समाज में जागरूकता बढ़ाना भी है. सरकार का फोकस एक ऐसी समग्र रणनीति पर है जिसमें रोकथाम, उपचार और सख्त कार्रवाई तीनों पहलुओं को समान महत्व दिया जाए.
सिंथेटिक ड्रग्स और डार्कनेट तस्करी पर विशेष नजर
सरकार आने वाले वर्षों में सिंथेटिक ड्रग्स और डार्कनेट के माध्यम से होने वाली तस्करी को सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक मान रही है. इसी वजह से नए रोडमैप में तकनीक आधारित निगरानी, नेटवर्क-केंद्रित प्रवर्तन और एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय पर विशेष जोर दिया गया है.
दस्तावेज़ में अलग-अलग एजेंसियों और विभागों की जिम्मेदारियां, लक्ष्य और समय-सीमा भी स्पष्ट रूप से निर्धारित की गई हैं, ताकि नशे के खिलाफ अभियान को अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाया जा सके.
एनसीबी की वार्षिक रिपोर्ट भी होगी जारी
इस मौके पर गृह मंत्री एनसीबी की वार्षिक रिपोर्ट 2025 भी जारी करेंगे. साथ ही जम्मू और गुवाहाटी में तैयार किए गए एनसीबी के नए आंचलिक कार्यालयों का उद्घाटन भी किया जाएगा. माना जा रहा है कि इन नए कार्यालयों से सीमावर्ती और संवेदनशील क्षेत्रों में मादक पदार्थों की तस्करी पर निगरानी और मजबूत होगी.
बैठक के दौरान ‘ड्रग डिस्पोज़ल फोर्टनाइट कैंपेन’ की भी समीक्षा होगी. यह विशेष अभियान देशभर में जब्त किए गए नशीले पदार्थों को कानूनी प्रक्रिया के तहत नष्ट करने के लिए चलाया जा रहा है. अनुमान है कि इस अभियान के दौरान विभिन्न केंद्रीय और राज्य एजेंसियां लगभग 2.09 लाख किलोग्राम मादक पदार्थ नष्ट करेंगी, जिनकी बाजार कीमत करीब 6,000 करोड़ रुपये आंकी गई है.
सामूहिक प्रयासों की होगी समीक्षा
यह उच्च-स्तरीय बैठक देश में नशे की समस्या से निपटने के लिए अब तक किए गए प्रयासों की समीक्षा का भी महत्वपूर्ण मंच बनेगी. केंद्र और राज्य सरकारों के प्रतिनिधि यह आकलन करेंगे कि अब तक की रणनीतियां कितनी प्रभावी रही हैं और आगे किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है.
सरकार का मानना है कि मादक पदार्थों की तस्करी और नशे के बढ़ते दुष्प्रभावों से लड़ने के लिए केवल कानून प्रवर्तन एजेंसियों की कार्रवाई पर्याप्त नहीं है. इसके लिए समाज, परिवार, शैक्षणिक संस्थानों और स्वास्थ्य सेवाओं को भी साथ लेकर चलना होगा.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत आयोजित यह बैठक आने वाले वर्षों में देश की एंटी-ड्रग रणनीति को नई दिशा देने और नशामुक्त भारत के लक्ष्य को मजबूत आधार प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.
-भारत एक्सप्रेस
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