भारतीय राजनीति के इतिहास में कुछ ऐसे महापुरुष हुए हैं, जिन्होंने सत्ता को साध्य नहीं, बल्कि समाज के सबसे गरीब व्यक्ति की सेवा का साधन माना. पंडित दीनदयाल उपाध्याय एक ऐसा ही नाम है, जिनका ‘एकात्म मानववाद’ और ‘अंत्योदय’ का दर्शन आज भी भारत की विकास नीतियों की आत्मा बना हुआ है. आज उनकी पुण्यतिथि पर देश उन्हें नमन कर रहा है. गृह मंत्री Amit Shah ने भी इस अवसर पर दीनदयाल जी के योगदान को याद किया.
असंख्य पीढ़ियों के लिए राष्ट्रनिर्माण की प्रेरणा
Amit Shah Tweet ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय को याद करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, ‘अंत्योदय व एकात्म मानववाद के प्रणेता, महान राष्ट्रचिंतक पं. दीनदयाल उपाध्याय जी की पुण्यतिथि पर उन्हें कोटिशः नमन.
अंत्योदय व एकात्म मानववाद के प्रणेता, महान राष्ट्रचिंतक पं. दीनदयाल उपाध्याय जी की पुण्यतिथि पर उन्हें कोटिशः नमन।
अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति का विकास ही राष्ट्र के विकास का परिचायक है, ऐसा विचार देने वाले दीनदयाल जी असंख्य पीढ़ियों के लिए राष्ट्रनिर्माण की प्रेरणा बने रहेंगे। pic.twitter.com/f1mJ0XIHPg— Amit Shah (@AmitShah) February 11, 2026
अमित शाह ने आगे लिखा कि अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति का विकास ही राष्ट्र के विकास का परिचायक है, ऐसा विचार देने वाले दीनदयाल जी असंख्य पीढ़ियों के लिए राष्ट्रनिर्माण की प्रेरणा बने रहेंगे.”
एकात्म मानववाद
पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने उस दौर में ‘एकात्म मानववाद’ (Integral Humanism) का सिद्धांत दिया, जब दुनिया पूंजीवाद और साम्यवाद के बीच बंटी हुई थी. उन्होंने बताया कि भारत को प्रगति के लिए विदेशी मॉडलों की नकल करने की ज़रूरत नहीं है. उनकी विचारधारा व्यक्ति, समाज, प्रकृति और ईश्वर के बीच एक अटूट संबंध की वकालत करती है.
अमिट विरासत और प्रेरणा
11 फरवरी 1968 को मुगलसराय स्टेशन पर संदिग्ध परिस्थितियों में उनका निधन हो गया था, लेकिन उनके विचार आज भी जीवंत हैं. उन्होंने एक बार कहा था, “जब तक हम समाज के सबसे गरीब व्यक्ति को रोटी, कपड़ा और मकान नहीं दिला देते, हमारा काम अधूरा है.”
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-भारत एक्सप्रेस
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