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सड़कें या मौत का जाल? जनकपुरी हादसे के आरोपी को मिली राहत, रोहिणी में सीवर ने निगली एक और जान

जनकपुरी में गड्ढे ने ली बैंक मैनेजर की जान, तो रोहिणी में खुले सीवर ने मजदूर को निगला. एक तरफ आरोपी ठेकेदार को कोर्ट से मिली अंतरिम राहत, दूसरी तरफ प्रशासन पर लगा सबूत मिटाने का आरोप.

Janakpuri Pit Accident Case

ये फोटो एआई द्वारा प्रतिकात्मक तौर पर बनाया गया है.

जनकपुरी में गड्ढे में गिरकर हुई बाइक सवार की मौत के मामले में आरोपी कॉन्ट्रेक्टर काविश गुप्ता को द्वारका कोर्ट ने अंतरिम अग्रिम जमानत दे दी है. कोर्ट ने उन्हें जांच में शामिल होने का निर्देश देते हुए अगली सुनवाई तक गिरफ्तारी जैसी किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है.

क्या था पूरा मामला?

दरअसल, जनकपुरी में दिल्ली जल बोर्ड की लापरवाही ने HDFC बैंक के असिस्टेंट मैनेजर कमल ध्यानी की जान ले ली थी. उनकी बाइक एक गहरे और असुरक्षित गड्ढे में समा गई थी. इस मामले में पुलिस ने सख्त कार्रवाई करते हुए कांट्रेक्टर कविश गुप्ता के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था, लेकिन अब इस केस में एक नया मोड़ आया है.

द्वारका कोर्ट ने कविश गुप्ता को अंतरिम अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) दे दी है. अदालत ने निर्देश दिया है कि ठेकेदार को जांच में तो शामिल होना होगा, लेकिन अगली सुनवाई तक पुलिस उनके खिलाफ गिरफ्तारी जैसी कोई भी दंडात्मक कार्रवाई नहीं कर सकेगी.

एक और ऐसी ही मंजर

बता दें कि अभी कमल ध्यानी की मौत की गूंज शांत भी नहीं हुई थी कि रोहिणी के बेगमपुर इलाके में एक और दिल दहला देने वाला हादसा हो गया. यहां बिहार के समस्तीपुर से आए 32 वर्षीय मजदूर बिरजू कुमार की एक खुले सीवर में गिरकर मौत हो गई.

सबूत मिटाने की भी हुई कोशिश?

घटना के बाद जो मंजर दिखा, वो प्रशासन की संवेदनहीनता को उजागर करता है. स्थानीय वकील तेजपाल यादव का आरोप है कि बिरजू की मौत के बाद डीडीए (DDA) के अधिकारी आनन-फानन में मौके पर पहुंचे और सीवर के ढक्कन लगाने लगे. ऐसा लगा मानो हादसे की जिम्मेदारी लेने के बजाय साक्ष्यों को छिपाने की कोशिश की जा रही हो.

स्थानीय निवासियों का कहना है कि उस सड़क पर एक भी सीवर ढका हुआ नहीं था, जबकि वहां छोटे बच्चे दिन भर खेलते हैं. हैरानी की बात यह है कि जब पुलिस की इमरजेंसी हेल्पलाइन ‘112’ पर फोन किया गया, तो पता चला कि संबंधित विभाग ने इस हादसे की कोई आधिकारिक सूचना तक दर्ज नहीं कराई थी.

वहीं, बिरजू अपने परिवार का इकलौता सहारा था और जल्द ही अपने गांव वापस लौटने की योजना बना रहा था. लेकिन दिल्ली की सड़कों की बदहाली ने उसके सारे सपनों को सीवर के गंदे पानी में दफन कर दिया.

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-भारत एक्सप्रेस



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