छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के बाद अब गुजरात सरकार ने भी ‘एनालॉग पनीर’ यानी कृत्रिम पनीर के उत्पादन, भंडारण और बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है. बैन के बाद द्य व औषधि प्रशासन ने इसके इस्तेमाल पर भी निगरानी को बढ़ा दिया है. जानें आखिर क्यों FASSAI को ऐसा कदम उठाना पड़ा और क्या है एनालॉग पनीर?
क्या है यह ‘एनालॉग पनीर’?
दरअसल, जहां असली पनीर भैंस या गाय के दूध सा बनाया जाता है. वहीं, एनालॉग पनीर बिना दूध के बनता है. इसके चलते यह असल पनीर से सस्ता पर स्वाद में बिल्कुल वैसा ही होता है.
बता दें कि इसे पारंपरिक तरीके से दूध को फाड़कर नहीं, बल्कि वनस्पति तेल (खासकर पाम ऑयल), स्टार्च, स्किम्ड मिल्क पाउडर और रसायनों को मिलाकर तैयार किया जाता है.
असली पनीर शुद्ध दूध से बनता है और प्रोटीन व कैल्शियम का पावरहाउस होता है, जबकि एनालॉग पनीर में सिर्फ वसा और कार्बोहाइड्रेट होता है. वहीं, असली पनीर जल्दी खराब हो जाता है, लेकिन प्रिजर्वेटिव्स के कारण यह कृत्रिम पनीर कई दिनों तक फ्रेश दिखता रहता है.
एनालॉग पनीर के बड़े नुकसान
सस्ता होने के कारण कई रेस्तरां, ढाबे, पिज्जा आउटलेट्स और स्ट्रीट फूड वेंडर्स इसका जमकर इस्तेमाल करते हैं. लेकिन डॉक्टरों के अनुसार यह शरीर के लिए बेहद नुकसानदायक है. इसमें मौजूद घटिया वनस्पति तेल और ट्रांस फैट शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ाते हैं, जिससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है. इसके अलावा, इसमें मौजूद कृत्रिम इमल्सीफायर और अत्यधिक स्टार्च पाचन तंत्र को बिगाड़ते हैं और लंबे समय तक सेवन से लिवर को नुकसान पहुंचा सकते हैं.
क्यों उठाना पड़ा यह कदम?
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने यह कदम धोखाधड़ी पर लगाम लगाने और किसानों के हितों की रक्षा के कारण उठाया है. रेस्तरां और व्यापारी इस सस्ते विकल्प का इस्तेमाल कर ग्राहकों से असली पनीर के पूरे दाम वसूलते है. वहीं, इस सस्ते विक्लप के कारण असली दूध की मांग घट रही थी, जिसका सीधा असर देश के डेयरी किसानों और पशुपालकों पर पड़ रहा था.
ये भी पढ़ें: Fatehpur News: पांच रुपये की टॉफी पर मां ने छह साल के बेटे के तलवे गर्म चाकू से दागे, कमरे में किया बंद
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

