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आस्था पर चोट, अब कानूनी हंटर! राम मंदिर दान घोटाले में 9 आरोपियों पर FIR; जानिए कौन-कौन आया शिकंजे में

अयोध्या राम मंदिर दान घोटाला मामले में एसआईटी ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. आरोपी सीसीटीवी कैमरों के सामने पीठ कर मोजे, पैंट और बाथरूम में नोटों की गड्डियां छिपाकर चोरी करते थे. अब तक 60 लाख रुपये बरामद हो चुके हैं.

Ayodhya Ram Mandir Donation Scam SIT Reveals Shocking Details Champat Rai Resigns

Ram Mandir Donation Scam: उत्तर प्रदेश के अयोध्या के राम मंदिर में दान पात्र और चढ़ावे की रकम में हुए महा-घोटाले को लेकर विशेष जांच दल (SIT) ने जो खुलासे किए हैं, उसने पूरी दुनिया के राम भक्तों को झकझोर कर रख दिया है. रामलला के चरणों में आने वाले चढ़ावे पर हाथ साफ करने वाले ये आरोपी किसी आम जेबकतरे की तरह नहीं, बल्कि एक पूरा सिंडिकेट बनाकर डकैती डाल रहे थे.

इस बेहद संवेदनशील और शर्मनाक मामले की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और वरिष्ठ सदस्य अनिल मिश्रा ने तत्काल प्रभाव से अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है, जिसने देश की राजनीति और धार्मिक गलियारों में भूकंप ला दिया है.

मोजे-पैंट में ठूंसते थे नोट

एसआईटी की जांच में सामने आया है कि जब भी रामलला के दान पात्र को खोलकर पैसों की गिनती शुरू होती थी, तो यह गैंग बड़ी चालाकी से सीसीटीवी (CCTV) कैमरों के सामने अपनी पीठ करके बैठ जाता था. नोटों के बंडल बनाने के दौरान ये लोग बड़ी ही सफाई से 500-500 के नोटों की पूरी गड्डियां अपने मोजों और पैंट के अंदर छिपा लेते थे.

हद तो तब हो गई जब यह पता चला कि चोरी की गई रकम को कुछ देर के लिए मंदिर परिसर के ही बाथरूम में भी छुपाया जाता था. पुलिस ने अब तक आरोपियों के पास से करीब 60 लाख रुपये कैश बरामद कर लिया है.

रिटायर्ड बैंक कर्मी की देखरेख में चल रहा था खेल

इस पूरी साजिश का नेटवर्क बेहद मजबूत था. नोटों की यह गिनती सेंट्रल बैंक के रिटायर्ड कर्मचारी और मंदिर के गणना प्रमुख सुभाष चंद्र श्रीवास्तव की देखरेख में हो रही थी, जिसकी भूमिका अब पूरी तरह संदिग्ध है. जांच में जिन मुख्य आरोपियों के नाम उजागर हुए हैं, उनमें मनीष यादव, लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, करुणेश पांडे, रमाशंकर मिश्रा और चंपत राय का पूर्व ड्राइवर राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू शामिल हैं.

अयोध्या पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 8 नामजद और 1 अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत मुकदमा दर्ज किया है. फिलहाल, चंपत राय और गोपाल राव बंद कमरे में कानूनी सलाहकारों के साथ आगे की रणनीति बना रहे हैं, वहीं जांच एजेंसियां फरार आरोपियों की धरपकड़ के लिए लगातार छापेमारी कर रही हैं.

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-भारत एक्सप्रेस



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