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खुद जिस बोर्ड के उपाध्यक्ष, वहीं से ले ली भारी-भरकम सब्सिडी! केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी ने कैसे खीरे की खेती कर उठा लिये 99 लाख

Bhagirath Choudhary Subsidy: केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी को राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड यानी NHB की MIDH योजना के तहत 99.03 लाख रुपये की सब्सिडी मिली है. बड़ी बात यह है कि भागीरथ चौधरी खुद कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री हैं और इसी नाते NHB के पदेन उपाध्यक्ष भी हैं.

Bhagirath Choudhary Subsidy

Bhagirath Choudhary Subsidy

रिपोर्ट- जयप्रकाश शर्मा, डीडवाना, राजस्थान


Bhagirath Choudhary Subsidy: केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी एक सरकारी सब्सिडी को लेकर सवालों के घेरे में आ गए हैं. यह मामला राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले के पीह गांव स्थित उनके खीरे के फॉर्म से जुड़ा है.

रिकॉर्ड के मुताबिक, चौधरी को राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड यानी NHB की MIDH योजना के तहत 99.03 लाख रुपये की सब्सिडी मिली है. बड़ी बात यह है कि भागीरथ चौधरी खुद कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री हैं और इसी नाते NHB के पदेन उपाध्यक्ष भी हैं.

खीरे की खेती में 1.99 करोड़ रुपये की लागत आई

उनके खीरे की खेती वाले इस प्रोजेक्ट की कुल लागत करीब 1.99 करोड़ रुपये बताई गई है. इसके लिए उन्होंने HDFC बैंक से 1.49 करोड़ रुपये का लोन लिया था. योजना के नियमों के मुताबिक, प्रोजेक्ट लागत का अधिकतम 50 प्रतिशत या 1 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी दी जा सकती है. इसी प्रावधान के तहत 30 मार्च 2026 को 99.03 लाख रुपये सीधे उनके लोन खाते में ट्रांसफर किए गए.

इस मामले में सबसे ज्यादा चर्चा मंजूरी की रफ्तार को लेकर हो रही है. रिकॉर्ड बताते हैं कि भागीरथ चौधरी ने इस योजना के लिए 15 अप्रैल 2025 को आवेदन किया था और सिर्फ 14 दिन बाद यानी 29 अप्रैल 2025 को उन्हें मंजूरी मिल गई. इसके बाद 11 मार्च 2026 को प्रोजेक्ट को अंतिम मंजूरी दे दी गई.

अंतिम मंजूरी देने वाली समिति में नहीं होती भूमिका

भागीरथ चौधरी अजमेर से भाजपा सांसद हैं और 2024 से केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री हैं. इसी पद के कारण वे राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड से भी जुड़े हुए हैं. हालांकि, कागजों के मुताबिक अंतिम मंजूरी देने वाली समिति में मंत्री की सीधी भूमिका नहीं होती.

ये भी पढ़ें- अपने ही मंत्रालय से 99 लाख की सब्सिडी लेने पर घिरे केंद्रीय मंत्री, भागीरथ चौधरी बोले- मैं किसान हूं, कुछ छुपाया नहीं

लेकिन सवाल यहीं से शुरू होता है. जब कोई मंत्री उसी मंत्रालय से जुड़ी योजना का लाभार्थी बनता है, जिसके तहत सब्सिडी जारी होती है, तो हितों के टकराव यानी conflict of interest की बहस खड़ी होना स्वाभाविक है.

अब विपक्ष और आलोचक यही पूछ रहे हैं कि क्या आम किसानों की फाइलें भी इतनी तेजी से आगे बढ़ती हैं, जितनी तेजी से एक केंद्रीय मंत्री के प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली?

-भारत एक्सप्रेस



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