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UP News: “पहली बार सर्विस बुक में दर्ज जन्मतिथि, बाद में नहीं होगी संशोधित”, अदालत का बड़ा फैसला, बेसिक शिक्षिका की याचिका खारिज

Prayagraj: कोर्ट ने कहा, भले ही जन्मतिथि को संशोधित कर सही कर दिया गया हो, लेकिन नौकरी के समय सर्विस बुक में जो जन्मतिथि रिकॉर्ड की गई है, उसे बाद में सर्विस बुक में संशोधित नहीं किया जा सकता है.

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फोटो- सोशल मीडिया

Allahabad High Court: शनिवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जन्मतिथि संशोधित करने के मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि, कर्मचारी के सर्विस बुक में प्रथम बार दर्ज जन्मतिथि संशोधित नहीं की जा सकती. इसी के साथ कोर्ट ने ये भी कहा कि, भले ही जन्मतिथि को संशोधित कर सही कर दिया गया हो, लेकिन नौकरी के समय सर्विस बुक में जो जन्मतिथि रिकॉर्ड की गई है, उसे बाद में सर्विस बुक में संशोधित नहीं किया जा सकता है.

सूत्रों के मुताबिक, कोर्ट ने ये फैसला सुनाते हुए झांसी जिले में प्राथमिक विद्यालय में नियुक्त अध्यापिका कविता कुरील की याचिका को खारिज कर दिया है. ये निर्णय जस्टिस मंजीव शुक्ला द्वारा दिया गया है. बता दें कि शिक्षिका ने याचिका दाखिल कर बेसिक शिक्षा अधिकारी झांसी के 19 अप्रैल 2023 के आदेश को चुनौती दी थी. दरअसल बेसिक शिक्षा अधिकारी ने अपने पूर्व पारित आदेश दिनांक 25 मई 2023 को वापस ले लिया था और यूपी रिक्रूटमेंट ऑफ सर्विस (डिटरमिनेशन आफ डेथ ऑफ़ बर्थ) रूल्स 1994 के नियम दो के तहत टीचर की सर्विस बुक में रिकॉर्ड की गई जन्मतिथि को संशोधित करने से मना कर दिया था. इसी को लेकर शिक्षिका ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन कोर्ट ने भी शिक्षिका का याचिका खारिज कर दी है.

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कोर्ट ने कही ये बात

अपने फैसले में कोर्ट ने बेसिक शिक्षा परिषद के तर्क को सही माना है और कहा है कि यूपी रिक्रूटमेंट आफ सर्विस (डिटरमिनेशन का डेट ऑफ बर्थ) रूल्स 1974 के नियम दो के मुताबिक, सर्विस बुक में हाईस्कूल रिकॉर्ड के आधार पर दर्ज की गई जन्मतिथि में संशोधन नहीं किया जा सकता. इसी के साथ ही अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए इस नियमावली की विस्तार से चर्चा की है औऱ सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस नियमावली में प्रतिपादित सिद्धांत को आधार बनाते हुए फैसला दिया है. इसी के साथ कहा है कि नियमावली से सब कुछ साफ होता है. इसमें कोई दुविधा नहीं है कि सर्विस बुक में दर्ज की गई जन्मतिथि में संशोधन नहीं किया जा सकता और वह भी तब जब कर्मचारी रिटायरमेंट के करीब हो. कोर्ट में दाखिल मामले के मुताबिक, हाई स्कूल सर्टिफिकेट के अनुसार याची टीचर की जन्मतिथि 3 नवंबर 1960 दर्ज थी. उनके प्रोविजनल सर्टिफिकेट में तीन नवंबर 1967 दर्ज थी. तो वहीं हाई स्कूल सर्टिफिकेट के आधार पर उनके सर्विस बुक में जन्मतिथि 3 नवंबर 1960 रिकॉर्ड की गई थी. याची ने जब लम्बे समय तक नौकरी कर ली तो वर्ष 1997 एवं 1998 में सचिव माध्यमिक शिक्षा परिषद को अर्जी दी और जन्मतिथि में संशोधन करने की मांग की. इस पर 2021 में जन्मतिथि संशोधित हो गई और हाई स्कूल सर्टिफिकेट मिल गया. इसके बाद याची ने सर्विस बुक में संशोधित जन्म तिथि दर्ज करने की मांग की थी, जिसे बेसिक शिक्षा अधिकारी झांसी ने मना कर दिया था. इसी के बाद याची ने कोर्ट का रुख किया.

माध्यमिक शिक्षा परिषद ने मानी अपनी गलती

याची के अधिवक्ता के एस कुशवाहा ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि याची के हाई स्कूल सर्टिफिकेट के अनुसार डेट ऑफ बर्थ 3 नवंबर 1967 है. इस बारे में माध्यमिक शिक्षा परिषद ने अपनी गलती मानी और सर्टिफिकेट ठीक कर दिया. इस पर शिक्षिका ने मांग की कि, हाईस्कूल सर्टिफिकेट के आधार पर उक्त नियमावली के तहत याची अध्यापिका के सर्विस बुक में जन्मतिथि 3 नवंबर 1960 की जगह 3 नवंबर 1967 दर्ज कर ली जाए. तो वहीं याची को सर्विस बुक में दर्ज जन्म तिथि के अनुसार रिटायर कर दिया गया है.

बेसिक शिक्षा अधिकारी के अधिवक्ता ने दिया ये तर्क

बेसिक शिक्षा अधिकारी झांसी की ओर से अधिवक्ता रामानंद पांडेय ने मीडिया को बताया कि याची की नियुक्ति बतौर सहायक अध्यापिका वर्ष 2006 में औरैया में हुई थी. हाई स्कूल सर्टिफिकेट के अनुसार उस समय याची की डेट ऑफ बर्थ 3 नवंबर 1960 दर्ज थी. जबकि सर्टिफिकेट के आधार पर और उसमें दर्ज जन्मतिथि को आधार मानते हुए सर्विस बुक में 3 नवंबर 1960 जन्मतिथि दर्ज की गई.

-भारत एक्सप्रेस

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