Brij Bhushan Sharan Singh on Elon Musk: उत्तर प्रदेश की कैसरगंज लोकसभा सीट से पूर्व सांसद और भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह अपने बयानों से एक बार फिर सियासी अखाड़े के केंद्र में आ गए हैं. इस बार उनके निशाने पर कोई स्थानीय विपक्षी नेता नहीं, बल्कि सीधे दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी और टेस्ला-स्पेसएक्स के मालिक एलन मस्क आ गए हैं.
राजधानी दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आयोजित ‘लहरा दो तिरंगा मार्च’ पर तीखा प्रहार करते हुए बृजभूषण शरण सिंह ने दावा किया है कि इस पूरे आंदोलन की डोर सात समंदर पार बैठे अमेरिकी उद्योगपति एलन मस्क के हाथों में है.
कोर्ट को धमकाने के लिए निकला मार्च (Brij Bhushan Elon Musk For CJP Protest)
बृजभूषण शरण सिंह ने दिल्ली में होने वाले इस मार्च को देश की संप्रभुता और न्यायपालिका के खिलाफ गहरी अंतरराष्ट्रीय साजिश करार दिया. उन्होंने कहा कि आजाद भारत के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट को धमकाने और डराने के लिए कोई मार्च निकाला गया हो. जो विदेशी ताकतें भारत में अपनी शर्तों पर धंधा करना चाहती हैं, जब उनकी दाल नहीं गलती तो वे ऐसे आंदोलनों को हवा देती हैं और फंडिंग करती हैं.
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पड़ोसी मुल्कों से तुलना पर ऐतराज
पूर्व सांसद ने तल्ख लहजे में कहा कि कुछ संगठन भारत की तुलना पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे अस्थिर देशों से करने की कोशिश कर रहे हैं, जो सीधे तौर पर देश को बदनाम करने का सुनियोजित षड्यंत्र है.
सेंट्रल पार्क में जुटने का आह्वान (Protest Context in Connaught Place)
यह पूरा विवाद तब गरमाया जब सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 की शाम 5:00 बजे दिल्ली के कनॉट प्लेस (सेंट्रल पार्क) में हाथ में तिरंगा लेकर जमा होने का ऐलान किया. इस मार्च को आम आदमी पार्टी (AAP) के साथ-साथ वामपंथी छात्र संगठनों आइसा (AISA) और एसएफआई (SFI) का खुला समर्थन मिला है. दिल्ली के अलावा मुंबई के आजाद मैदान में भी इसी तरह के प्रदर्शन की तैयारी की गई है.
सोशल मीडिया पर बयानों की बाढ़ (CJP Protest Elon Musk Conection)
बृजभूषण शरण सिंह ने एलन मस्क के कथित इशारों का दावा तो ठोक दिया, लेकिन इसके समर्थन में उन्होंने कोई पुख्ता दस्तावेज या सबूत मीडिया के सामने नहीं रखा. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि स्टारलिंक और विदेशी कंपनियों की भारत में एंट्री को लेकर चल रही नीतिगत बहसों के बीच पूर्व सांसद ने इस आंदोलन को सीधे अंतरराष्ट्रीय कॉरपोरेट लॉबी से जोड़कर राष्ट्रवाद की नई बहस छेड़ दी है.
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