बिहार चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस अब चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को बड़ा मुद्दा बनाकर मैदान में उतरने जा रही है. पार्टी ने घोषणा की है कि 14 दिसंबर को सुबह 11:30 बजे दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘वोट चोरी’ और SIR प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोपों के खिलाफ अपनी बड़ी रैली करेगी.
रैली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और प्रियंका गांधी मौजूद रहेंगे. सोनिया गांधी की उपस्थिति उनके स्वास्थ्य पर निर्भर करेगी. इस दौरान मतदान प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चलाए गए हस्ताक्षर अभियान के दस्तावेज़ भी मंच पर प्रदर्शित किए जाएंगे, जिन्हें बाद में राष्ट्रपति को भेजा जाएगा.
बिहार हार के बाद कांग्रेस की बड़ी समीक्षा बैठक
दो दिन पहले कांग्रेस ने SIR पर गंभीर मंथन करते हुए 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रभारियों, प्रदेश अध्यक्षों, विधायक दल के नेताओं और सचिवों के साथ विस्तृत बैठक की.
इस बैठक में दो बड़े फैसले लिए गए –
1. दिसंबर महीने में SIR प्रक्रिया के खिलाफ देशव्यापी संदेश वाली बड़ी रैली
2. चुनावी अवधि में अन्य राज्यों में महिलाओं को ₹10,000 देने जैसी नई घोषणाएँ न करने का सुझाव
बैठक में यह भी जोर दिया गया कि आचार संहिता लागू होने के बाद वोटर लिस्ट में किसी भी तरह का नाम जोड़ने या हटाने की अनुमति नहीं होनी चाहिए.
दिग्विजय सिंह का बड़ा सवाल
बैठक के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने संगठन की कमजोरी को पार्टी की सबसे बड़ी समस्या बताया. उन्होंने कहा, ‘BLA की बात हो रही है, लेकिन हमारे पास हैं ही कहां? कई राज्यों में संगठन बेहद कमजोर है.b UP और बिहार में BLA तक नियुक्त नहीं किए गए.”
उन्होंने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया में गड़बड़ी कर भाजपा और चुनाव आयोग खुले तौर पर चुनावों को प्रभावित कर रहे हैं, और कांग्रेस को बूथ स्तर पर मजबूत होना होगा.
इंडिया गठबंधन में बढ़ता तनाव
बिहार परिणामों ने इंडिया गठबंधन के भीतर खींचतान को भी उभार दिया है. जहां कांग्रेस लगातार वोट चोरी और चुनाव आयोग को लेकर सवाल उठा रही है, वहीं उसके सहयोगी दल इसी हार के लिए कांग्रेस के प्रदर्शन और नेतृत्व को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं.
सूत्रों के अनुसार, TMC, समाजवादी पार्टी, शिवसेना (UBT) जैसे दल कांग्रेस से खासे नाराज हैं. गठबंधन में असंतोष और दरारें साफ दिखाई दे रही हैं.
संसद सत्र से पहले कांग्रेस के लिए दोहरी चुनौती
शीतकालीन सत्र शुरू होने से पहले कांग्रेस के लिए स्थिति कठिन हो गई है. एक तरफ उसे चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ियों को लेकर मजबूत राष्ट्रीय नैरेटिव बनाना है,
दूसरी ओर गठबंधन की फूट को काबू में रखते हुए विपक्ष की एकजुटता भी बनाए रखनी है.
ये भी पढ़ें: जानलेवा SIR! वोटर लिस्ट सर्वे में काम का बोझ, मध्य प्रदेश में दो BLO की मौत, एक लापता
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.





