केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को ‘अंत्योदय’ और एकात्म मानववाद के प्रणेता, महान राष्ट्रसेवक श्रद्धेय पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती (Deendayal Upadhyaya Jayanti 2026) पर नमन अर्पित किया. गृह मंत्री ने उनके सिद्धांतों और अंत्योदय के विजन को याद करते हुए देश के निर्माण में उनके अभूतपूर्व योगदान को रेखांकित किया.
जयंती पर अमित शाह का संदेश क्या?
गृह मंत्री अमित शाह ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के विचारों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने राजनीति को कभी भी केवल सत्ता हासिल करने का जरिया नहीं माना. उनके लिए राजनीति राष्ट्रसेवा और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के उत्थान का सबसे सशक्त माध्यम थी. उनका पूरा जीवन देश के गरीब, वंचित और शोषित वर्ग को मुख्यधारा में लाने के लिए समर्पित रहा.
”राष्ट्रधर्म’ और ‘पाञ्चजन्य’ के जरिए राष्ट्रीय चिंतन को दी नई धार’
अमित शाह ने पंडित जी की पत्रकारिता और वैचारिक यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने ‘राष्ट्रधर्म’ और ‘पाञ्चजन्य’ जैसी पत्रिकाओं के माध्यम से देश के राष्ट्रीय चिंतन को नया स्वर दिया. उन्होंने अपनी तीक्ष्ण लेखनी और वैचारिक स्पष्टता से देश के सामने आने वाले मूलभूत प्रश्नों को उठाया और जन-जन में देशभक्ति की अलख जगाई.
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आंदोलनों के जरिए उठाई राष्ट्रीय एकता की आवाज
पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने कई ऐतिहासिक आंदोलनों के जरिए राष्ट्रीय एकता और अखंडता के मुद्दों को पूरी प्रखरता से उठाया. अमित शाह ने कहा कि उनका मानना था कि जब तक समाज का अंतिम व्यक्ति सशक्त नहीं होगा, तब तक राष्ट्र पूर्ण रूप से शक्तिशाली नहीं बन सकता. उनके इसी अंत्योदय के विचार पर आज देश की कल्याणकारी नीतियां संचालित हो रही हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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