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Delhi Fire Report: फायर सर्विस के आंकड़ों ने देश की राजधानी दिल्ली के होश उड़ा दिए है. पिछले कुछ सालों में यहां आग लगने की घटनाओं ने कई परिवारों को उम्र भर का दर्द दिया है. दिल्ली फायर सर्विस के हालिया आंकड़े डराने वाले हैं. अगर पिछले तीन साल यानी 2024 से 15 अप्रैल 2026 तक का हिसाब देखें, तो दिल्ली में आग की वजह से कुल 225 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. साल 2024 में जहां आग ने 113 लोगों की जान ली, वहीं 2025 में 76 और साल 2026 में सिर्फ 15 अप्रैल तक ही 36 लोग जिंदा जल गए या धुएं का शिकार हो गए.
सिर्फ 3 महीनों में आईं 8 हजार से ज्यादा कॉल
यह स्थिति कितनी भयानक है, इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि इस साल के शुरुआती तीन महीनों में ही फायर ब्रिगेड के पास हजारों फोन आ चुके हैं. आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी में आग लगने की 2785 कॉल मिलीं, फरवरी में यह आंकड़ा 2471 था और मार्च आते-आते बढ़कर 2838 तक पहुंच गया. यानी हर दिन दिल्ली के किसी न किसी कोने से आग की खबरें आ रही हैं.
आखिर क्यों बार-बार धधक रही है दिल्ली?
एक्सपर्ट्स और जांच रिपोर्टों की मानें तो इन हादसों के पीछे कोई एक वजह नहीं, बल्कि हमारी और सिस्टम की कई बड़ी लापरवाहियां हैं:
- शॉर्ट सर्किट और ओवरलोड: गर्मियों में बिजली का लोड बढ़ना और घटिया वायरिंग सबसे बड़ा कारण बनती है.
- अवैध कमर्शियल काम: रिहायशी इलाकों में बिना एनओसी के चल रही अवैध फैक्ट्रियां और दुकानें.
- संकरी गलियां और अतिक्रमण: तंग रास्तों के कारण हादसों के वक्त दमकल की गाड़ियां मौके पर समय से नहीं पहुंच पातीं.
- वेंटिलेशन की कमी और जहरीला धुआं: ज्यादातर इमारतों में हवा बाहर निकलने का रास्ता नहीं होता, जिससे लोग आग से कम और धुएं से दम घुटने के कारण ज्यादा मरते हैं. बेसमेंट में राहत काम न हो पाना भी मौत का जाल बनता है.
दिल्ली के 3 जख्म
- मई 2022 (मुंडका हादसा): एक चार मंजिला कमर्शियल इमारत में लगी आग ने 27 लोगों को मौत की नींद सुला दिया था.
- फरवरी 2024 (अलीपुर हादसा): एक पेंट फैक्ट्री में हुए ब्लास्ट और आग के कारण 11 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी.
- मई 2024 (विवेक विहार हादसा): एक न्यूबॉर्न चाइल्ड केयर अस्पताल में लगी आग में 7 मासूम नवजात बच्चों ने दम तोड़ दिया था, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था.
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-भारत एक्सप्रेस
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