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दिल्ली हाईकोर्ट ने अनाधिकृत निर्माण सीलिंग प्रक्रिया पर NDMC, MCD और मंत्रालय से जवाब मांगा

दिल्ली हाईकोर्ट ने अनाधिकृत निर्माण की सीलिंग प्रक्रिया पर एनडीएमसी, एमसीडी और आवास मंत्रालय से जवाब मांगा है. अदालत ने प्रभावित व्यक्तियों को सीलिंग आदेश दिए बिना उनके अधिकारों का उल्लंघन होने की बात उठाई और इस पर 3 अप्रैल को सुनवाई तय की.

Delhi High Court
Aarika Singh Edited by Aarika Singh

दिल्ली हाईकोर्ट ने अनाधिकृत निर्माण नियमों के तहत सीलिंग प्रक्रिया के बारे में नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (एनडीएमसी), दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) और आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय (एमओएचयूए) से जवाब मांगा है. मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय एवं जस्टिस तुषार राव गेडेला की पीठ ने सभी से जवाब देने को कहते हुए सुनवाई 3 अप्रैल के लिए स्थगित कर दी है.

प्रभावित व्यक्ति को सीलिंग दिया जाता है आदेश

याचिकाकर्ता अधिवक्ता अमित साहनी ने पीठ को बताया कि सीलिंग नियमों के तहत परिसर को सील करने के बाद ही प्रभावित व्यक्ति को सीलिंग का आदेश दिया जाता है. यह उनके अधिकारों का उल्लंघन है. उन्होंने कहा कि प्रभावित व्यक्ति को सीलिंग आदेश दिए बिना परिसर को सील करने की प्रथा ऐसे व्यक्ति को उसके वैधानिक अधिकारों से वंचित करती है और यह अधिकार का मनमाना प्रयोग है. जबकि सीलिंग प्रक्रिया शुरू होने से पहले प्रभावित व्यक्तियों को सीलिंग आदेश की एक प्रति उपलब्ध कराई जानी चाहिए.

पीठ ने एनडीएमसी को बताया कि यह प्रक्रिया प्रभावित व्यक्ति को चुनौती देने के अधिकार को निर्थक कर देता है. ऐसे कैसे किया जा सकता है. एनडीएमसी के वकील ने सीलिंग नियमों के प्रावधानों को पढ़ा और कहा हमे इसको लेकर कठोर होना होगा. यह विधायी मंशा है. पीठ ने फिर सवाल किया कि मंशा चाहे जो भी हो, ऐसा कैसे किया जा सकता है? मान लीजिए कि कोई दुकान है, आप उसे सील कर देते हैं, उसकी दैनिक आय का क्या होगा, यह दंडनीय कैसे है.

एनडीएमसी के वकील ने जवाब दिया कि यह आगे के निर्माण को रोकने के लिए केवल एक अस्थायी व्यवस्था है. ऐसा नहीं है कि अनाधिकृत निर्माण को तोड़ने से पहले अपना पक्ष रखने के लिए कोई अवसर नहीं दिया जाता है. पहले नोटिस दिया जाता है. सील अस्थायी है.

-भारत एक्सप्रेस



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