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लाल किले के पास J&K नंबर की संदिग्ध कार, हाथ लगा फर्जी NIA कार्ड; दिल्ली में बड़ी साजिश या कुछ और?

राजधानी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था के बीच लाल किले के पीछे खड़ी एक संदिग्ध काले रंग की कार ने हड़कंप मचा दिया. पुलिस जांच में कार के अंदर से दो युवक और नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) का फर्जी आईडी कार्ड बरामद हुआ है. स्पेशल सेल और IB मामले की जांच में जुटी हैं.

Red Fort, Delhi News
Edited by Radha Priya

Delhi Red Fort News: राष्ट्रीय राजधानी में एक बार फिर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं. लाल किले के पीछे बुधवार को जम्मू-कश्मीर (J&K) नंबर की एक काले रंग की हुंडई कार संदिग्ध परिस्थितियों में खड़ी मिली. इस मामले में पुलिस ने कार में सवार दो युवकों को हिरासत में लिया है, जिनसे गहन पूछताछ की जा रही है.

जानकारी के अनुसार, कोतवाली थाने की पुलिस नियमित अलर्ट पेट्रोलिंग पर थी. रेड फोर्ट (लाल किला) के पीछे ‘दिल्ली चलो पार्क’ के पास खड़ी एक कार पर शक होने पर पुलिस ने उसकी जांच की. कार के भीतर दो युवक सवार थे, जिनकी पहचान पुलवामा (जम्मू-कश्मीर) निवासी मुदस्सर अहमद मीर और राहिल फिरदौस के रूप में हुई है.

बरामद हुआ NIA का फर्जी पहचान पत्र

तलाशी के दौरान मुदस्सर के पास से National Investigation Agency (NIA) का एक आईडी कार्ड मिला, जो प्रथम दृष्टया फर्जी प्रतीत हुआ. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तुरंत दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल, आईबी (IB) और अन्य केंद्रीय एजेंसियों को सूचना दी गई. इसके बाद दोनों युवकों को कोतवाली थाने लाया गया.

आरोपियों का बैकग्राउंड और दिल्ली आने का मकसद

प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि:

मुदस्सर अहमद मीर: यह पुलवामा में कार गैराज चलाता है. उसने दावा किया कि यह 15 वर्ष पुरानी कार उसने सेकंड हैंड खरीदी थी.

राहिल फिरदौस: राहिल के परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर बताई गई है. उसके पिता राजमिस्त्री हैं और हाल ही में एक हादसे के बाद लकवाग्रस्त हो गए. उसकी मां पुलवामा में SPO के रूप में कार्यरत हैं.

मुदस्सर ने कथित तौर पर राहिल को दिल्ली में नौकरी दिलाने का आश्वासन दिया था और इसके लिए 3000 रुपये एडवांस भी लिए थे. दोनों 13 फरवरी की रात दिल्ली पहुंचे थे और जामा मस्जिद इलाके के एक गेस्ट हाउस में ठहरे थे.

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NGO और केंद्रीय दफ्तरों से जुड़े होने का दावा

सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ में यह बात सामने आई है कि दोनों युवक नौकरी के सिलसिले में “डॉ. बी.आर. आंबेडकर यूथ ऑर्गेनाइजेशन” नामक एक NGO से जुड़े किसी व्यक्ति से मिलने गए थे. पूछताछ के दौरान उन्होंने कुछ अन्य नामों का भी जिक्र किया है, जिनके बारे में दावा किया गया है कि वे केंद्रीय दफ्तरों से जुड़े हैं. हालांकि, इन दावों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.

सुरक्षा एजेंसियों की संयुक्त पूछताछ जारी

फिलहाल, दिल्ली पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां दोनों युवकों से संयुक्त पूछताछ कर रही हैं. पुलिस का कहना है कि फर्जी आईडी कार्ड रखने के पीछे का असली मकसद और उनके दिल्ली आने के सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है. पूरी जांच और तथ्य सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी.

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-भारत एक्सप्रेस



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