दिलबर नेगी की हत्या के मामले में आरोपी शाहनवाज खान बरी
कड़कड़डूमा कोर्ट ने दिल्ली दंगे के दौरान एक मिठाई के दुकान में आग लगाने से 22 वर्षीय दिलबर नेगी की मौत के मामले में गिरफ्तार मोहम्मद शाहनवाज उर्फ शानू को सबूत के आभाव में संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है. दिलबर नेगी अनिल स्वीट्स कॉर्नर में वेटर का काम करता था. गोकलपुरी थाने में आईपीसी की धारा 147 (दंगा करने), धारा 148 (घातक हथियार से लैस दंगा करना), धारा 149 (अवैध रूप से एकत्र होना), धारा 302 (हत्या), धारा 201 (साक्ष्य मिटाना), धारा 436 ( आग लगाकर उवद्र्व करना) और धारा 427 (नुकसान पहुचाना) के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी.
आरोपी के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं-कोर्ट
आरोप लगाया गया था कि भीड़ ने तोड़फोड़ की थी और एक मिठाई की दुकान में आग लगा दी थी. कड़कड़डूमा कोर्ट ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुलस्त्य प्रमांचला ने कहा कि अभियुक्त के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है, जिससे पता चले कि वह अन्य दंगाइयों के साथ उस गोदाम में घुसा था, जहां शव मिला था. अक्टूबर 2023 में अदालत ने इस मामले में 11 लोगों को आरोपमुक्त कर दिया था, लेकिन केवल मोहम्मद शाहनवाज के खिलाफ आरोप तय किये थे.
12 आरोपियों को किया गया था गिरफ्तार
अदालत ने नोट किया कि घटना के तुरंत बाद किसी भी गवाह ने मोहम्मद शाहनवाज का नाम नहीं लिया था और न ही एफआईआर में उसके नाम का उल्लेख किया गया था. जांच के दौरान मामले में 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था. जांच के बाद 4 जून 2020 को चार्जशीट दाखिल किया गया था. गवाहों के बयानों के अनुसार दंगा हुआ था. जिसमें दंगाइयों ने पथराव किया, हिंदू विरोधी नारे लगाए, कई दुकानों और घरों में तोड़फोड़ की और आग लगा दी. दंगाइयों ने एक ईमारत में घुसकर नेगी की हत्या कर दी थी.
-भारत एक्सप्रेस
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