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हार से शुरुआत… जानिए कौन हैं देवेंद्र नाथ महतो जिनको छात्र झारखंड का ‘सोनम वांगचुक’ कहते है?

देवेंद्र नाथ महतो झारखंड के छात्र नेता और युवा कार्यकर्ता हैं, जो 2015 से छात्रवृत्ति, भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी, पेपर लीक और आरक्षण जैसे मुद्दों को लेकर आंदोलनों में सक्रिय रहे हैं.

देवेंद्र नाथ महतो

देवेंद्र नाथ महतो

झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का गुस्सा अब सड़क से आगे बढ़कर बड़े आंदोलन का रूप लेता दिखाई दे रहा है. 25 जुलाई से शुरू हुआ विरोध लगातार तेज हो रहा है और राजधानी रांची इसका प्रमुख केंद्र बन गई है. इसी बीच छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो आंदोलन का प्रमुख चेहरा बनकर सामने आए हैं. प्रदर्शनकारी छात्र उन्हें ‘झारखंड का सोनम वांगचुक’ तक कह रहे हैं.

रविवार रात 2 अगस्त को देवेंद्र नाथ महतो ने रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के बीच अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी. उनका कहना है कि सरकार के सामने लगातार विरोध दर्ज कराने के बावजूद जब कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो भूख हड़ताल उनके लिए आखिरी रास्ता रह गया था.

 क्या है छात्रों की मांग?

छात्रों का मुख्य विरोध सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर है. वे झारखंड लोक सेवा आयोग यानी JPSC और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग यानी JSSC से जुड़ी परीक्षाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं.

देवेंद्र नाथ महतो ने खास तौर पर 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करने की मांग की है. उनका कहना है कि जब तक परीक्षा प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं होती, तब तक इस परीक्षा को आगे बढ़ाना उचित नहीं होगा. प्रदर्शनकारी छात्र कथित अनियमितताओं की जांच CBI और ED से कराने की मांग भी कर रहे हैं.

कौन हैं देवेंद्र नाथ महतो?

देवेंद्र नाथ महतो रांची के एक छोटे गांव से आने वाले छात्र नेता हैं. उन्होंने बुंडू में अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी की और बाद में रांची की डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी यूनिवर्सिटी से उच्च शिक्षा हासिल की. उनके पास संस्कृत के अलावा कुरमाली, आदिवासी और क्षेत्रीय भाषाओं से जुड़ी पोस्टग्रेजुएट डिग्रियां हैं. उन्होंने हजारीबाग से B.Ed. की पढ़ाई भी की है.

महतो साल 2015 से छात्र आंदोलनों में सक्रिय रहे हैं. इस दौरान उन्होंने छात्रवृत्ति, पेपर लीक, भर्ती नियमों और आरक्षण नीति जैसे मुद्दों को लेकर आवाज उठाई. रविवार को उन्हें कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP की ओर से भी समर्थन मिला. पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने बताया कि उन्होंने देवेंद्र महतो और दूसरे छात्र नेताओं से वीडियो कॉल के जरिए बातचीत की है.

राजनीति में भी आजमा चुके हैं किस्मत

देवेंद्र नाथ महतो सिर्फ छात्र आंदोलनों तक सीमित नहीं रहे हैं. उन्होंने 2024 का लोकसभा चुनाव झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के टिकट पर रांची सीट से लड़ा था. इस चुनाव में उन्हें 1,32,647 वोट मिले थे.

इसके बाद उन्होंने 2024 का झारखंड विधानसभा चुनाव भी लड़ा था. विधानसभा चुनाव में महतो को 41,725 वोट मिले और वह तीसरे स्थान पर रहे.

उनके चुनावी हलफनामे के मुताबिक, उनके पास करीब 1.66 लाख रुपये की संपत्ति है. छात्र आंदोलनों और विरोध-प्रदर्शनों में सक्रियता के चलते उनके खिलाफ 11 मामले भी दर्ज हैं.

परीक्षा गड़बड़ियों को लेकर क्यों भड़के हैं छात्र?

झारखंड में मौजूदा आंदोलन की सबसे बड़ी वजह अलग-अलग सरकारी परीक्षाओं में सामने आई कथित गड़बड़ियां हैं. छात्रों का आरोप है कि JPSC सिविल सर्विस परीक्षा में OMR शीट से छेड़छाड़ और पेपर लीक जैसी शिकायतें सामने आईं. इसके अलावा परीक्षा कराने वाली एजेंसी TDPL की नियुक्ति को लेकर भी सवाल उठाया गया हैं. छात्रों का दावा है कि इस एजेंसी को पहले SSC जैसी कुछ सरकारी संस्थाओं ने ब्लैकलिस्ट किया था.

छात्र 2024 की JSSC CGL परीक्षा में पेपर लीक के मामले को भी उठा रहे हैं. हाई कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद परीक्षा को दोबारा आयोजित किया गया था. प्रदर्शनकारी इस पूरे मामले में जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं और CID जांच से संतुष्ट नहीं हैं.

इसी साल झारखंड एक्साइज कांस्टेबल कॉम्पिटिटिव परीक्षा यानी JECCE में भी कथित पेपर लीक का मामला सामने आया था. मामले में 159 उम्मीदवारों और पांच रैकेट लीडरों की गिरफ्तारी की बात सामने आई थी. आरोप है कि उम्मीदवारों से पेपर उपलब्ध कराने के बदले बड़ी रकम ली गई थी.

इसके अलावा 2025 की JAC कक्षा 10वीं बोर्ड परीक्षा में भी हिंदी और विज्ञान के प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले या परीक्षा के दौरान कोडरमा और गिरिडीह जैसे जिलों में सोशल मीडिया पर वायरल होने की खबर सामने आई थी. इसके बाद संबंधित परीक्षाओं को रद्द कर दोबारा आयोजित करना पड़ा.

देवेंद्र महतो ने क्या कहा?

देवेंद्र नाथ महतो ने अपने संघर्ष को झारखंड के युवाओं के भविष्य से जोड़ते हुए कहा कि यह आंदोलन किसी पद या राजनीतिक लाभ के लिए नहीं है, बल्कि निष्पक्ष, पारदर्शी और भ्रष्टाचार-मुक्त भर्ती व्यवस्था के लिए है.

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से बातचीत करने या इस्तीफा देने की मांग भी की. साथ ही उन्होंने आंदोलन को शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से जारी रखने की अपील की. उनका कहना है कि यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि राज्य के लाखों युवा अभ्यर्थियों के भविष्य की है.

सोनम वांगचुक से क्यों हो रही तुलना?

देवेंद्र नाथ महतो की तुलना सोनम वांगचुक से इसलिए की जा रही है क्योंकि हाल के दिनों में वांगचुक भी परीक्षा सुधारों की मांग को लेकर हुए आंदोलन का प्रमुख चेहरा बने थे. नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर 6 जून से छात्रों का धरना चल रहा था. 28 जून को सोनम वांगचुक इस प्रदर्शन में शामिल हुए और उन्होंने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने का ऐलान किया.

उनके आंदोलन से जुड़ने के बाद प्रदर्शन को देशभर में ज्यादा ध्यान मिला. केंद्र सरकार की ओर से परीक्षा सुधारों को लेकर लिखित भरोसा मिलने के बाद वांगचुक ने 23 जुलाई 2026 की देर रात अपनी 26 दिन लंबी भूख हड़ताल खत्म की थी. गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में उन्होंने सूप पीकर अनशन तोड़ा. इस दौरान उनका करीब 11 किलो वजन कम हुआ है.

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-भारत एक्सप्रेस



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