राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लेकर भोपाल में एक कार्यक्रम का आयोजन हुआ. उस कार्यक्रम में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के बयान पर मध्यप्रदेश की राजनीति गर्मा गई है. कार्यक्रम में स्कूली बच्चों को मिलने वाले पोषण को लेकर दिए बयान पर बबाल मच गया है.
सेव, अंजीर, दूध खिलाने पर जोर
राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लेकर भोपाल में एक सेमिनार का आयोजन हुआ. जिसमे मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के अलावा अन्य मंत्री, विधायक, और उच्च अधिकारी शामिल हुए. कार्यक्रम में अपने संबोधन के दौरान केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने स्कूली बच्चों के पोषण को लेकर चर्चा करते हुए कहा कि, मप्र में स्कूल में पढ़ने वाले डेढ़ करोड़ बच्चों में से 5 वी क्लास तक पढ़ने वाले 50 लाख बच्चो ने एप्पल देखा तक नहीं होगा, देखा होगा तो बाजार में देखा होगा, खाने की नहीं मिला होगा. अंजीर तो 10 वी के बाद उनकी जिंदगी में आया होगा. दूध तो उनके नसीब नहीं होता. धर्मेंद्र प्रधान ने अपनी पार्टी के स्थानीय विधायकों को कहा कि, भंडारे करवाने की जगह हफ्ते में एक दिन, एक बच्चे को एक सेव, एक अंजीर दे, उससे जो पोषण मिलेगा, उसमें से शायद कोई अब्दुल कलाम निकल जाए.
केंद्रीय मंत्री ने साधा निशाना
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस बयान को विपक्ष ने हाथों हाथ उठाते हुए मोहन यादव सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए. आज मीडिया से चर्चा करते हुए पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि, मप्र में स्कूलों में बच्चे कम हुए हैं, जबकि बजट बढ़ गया है. इस दौरान जीतू पटवारी ने केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के बयान का उल्लेख करते हुए मप्र के बच्चो में कुपोषण का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की.
मामले में विपक्ष के आरोपों पर उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने सफाई देते हुए कहा कि, हमारी सरकार कुपोषण, शिक्षा, स्वास्थ्य सहित हर क्षेत्र में स्थिति को बेहतर करने का प्रयास कर रहे हैं. विपक्ष द्वारा आरोप लगाना आसान है, जबकि मप्र में मातृ और शिशु मृत्यु दर कम हुई है. यह हमारे प्रयास ही है. उसमें हम काम कर रहे हैं.
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हालांकि कार्यक्रम में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कई मानकों पर मप्र सरकार की प्रशंसा भी की, मगर चुनौतियों को बताते समय विपक्ष को राज्य सरकार के घेरने का मुद्दा दे गए. विपक्ष का कहना है कि, यह केंद्र सरकार का बयान है, उनके पास भी मप्र के हालातों के आंकड़े होंगे. अब देखना होगा कि धर्मेंद्र प्रधान के इस बयान या नसीहत पर सरकार और पार्टी के विधायक कितना अमल करते हैं.
-भारत एक्सप्रेस के लिए अजय भटनागर की रिपोर्ट
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