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विश्व पुस्तक मेला दिल्ली में डॉ. सुनील शर्मा की पुस्तकें ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ व ’चैटजीपीटी’ पर हुई परिचर्चा

परिचर्चा सत्र में लेखक डॉ. सुनील कुमार शर्मा ने कहा ‘अतीत के परिवर्तनकारी तकनीकी बदलावों की तरह आर्टिफिशल इंटेलिजेंस भी वैसी ही चुनौतियां ला रही है।

Rohit Rai Edited by Rohit Rai

Delhi: राजधानी दिल्ली के प्रगति मैदान में चल रहे विश्व पुस्तक मेला में डॉ. सुनील कुमार शर्मा की पुस्तकें ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ व ‘चैटजीपीटी’ का लोकार्पण व परिचर्चा सत्र अयोजित हुआ। वाणी प्रकाशन ग्रुप के वाणी साहित्य घर में आयोजित इस सत्र में लोक सेवक, शोधकर्ता और लेखक डॉ. सुनील कुमार शर्मा के साथ दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के सहायक आचार्य डॉ. सुनील विपुल, एवं समीक्षक व अनुवादक कीर्ति बंसल ने किताब पर अपनी बातें रखी। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार-सम्पादक विशाल तिवारी ने किया।

आर्टिफिशल इंटेलिजेंस की खूबियां और खामियों पर चर्चा

परिचर्चा सत्र में लेखक डॉ. सुनील कुमार शर्मा ने कहा ‘अतीत के परिवर्तनकारी तकनीकी बदलावों की तरह आर्टिफिशल इंटेलिजेंस भी वैसी ही चुनौतियां ला रही है। एआई का इस्तेमाल हमारी डेली लाइफ में बहुत कॉमन हो चुका है और इसको नजरअंदाज करना लगभग नामुमकिन है मगर इसके प्रयोग को लेकर सतर्कता बरतने की जरूरत है। एआई मानव समाज की बहुत सी ज्वलंत समस्याओं का समाधान खोजने में सहायक हो सकता है हालांकि एआई की क्षमताओं के दुरुपयोग की संभावना को भी नकारा नहीं जा सकता है। अतः इन मुद्दों से संबंधित नियामक, मानक और सांस्कृतिक- संज्ञानात्मक पहलुओं पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।

नवीन विषयों पर किताब लाने का अनूठा प्रयास 

प्राध्यापक डॉ. सुनील विपुल ने कहा कि इस तरह की नवीन विषयों पर किताब लाने का यह प्रयास अनूठा है और इसके लिए लेखक और प्रकाशक दोनों बधाई के पात्र हैं। हिंदी में ऐसी किताबें उपलब्ध होने से विद्यार्थियों और शोधार्थियों को सहजता से विषय संबंधित जानकारी मिल सकेगी। पुस्तक में उपयोग के साथ साथ चुनौतियों पर भी बात की गई है जो इसे और विशिष्ट बनाती है।

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किताब की प्रासंगिकता पर चर्चा

समीक्षक कीर्ति बंसल ने भी किताब की प्रासंगिकता पर विस्तृत चर्चा की। किताब की सरल और सहज भाषा इसे बड़े पाठक वर्ग से जोड़ेगी। परिचर्चा के क्रम में पाठकों द्वारा लेखक से कई महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे गये। अरुण माहेश्वरी जी ने कई ज़रूरी सवालों को लेखक के सामने रखा। इस परिचर्चा द्वारा पाठकों को किताब के विषय में विस्तार से समझने का अवसर भी मिल गया। इस अवसर पर वरिष्ठ लेखक-आलोचक डॉ. शंभुनाथ, वरिष्ठ कवि मदन कश्यप, श्रीप्रकाश शुक्ल, प्रो. संजय जायसवाल, वाणी प्रकाशन ग्रुप की कार्यकारी निदेशक अदिति माहेश्वरी गोयल समेत कई साहित्य-प्रेमी और संस्कृति-प्रेमी मौजूद रहे।

-भारत एक्सप्रेस



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