हूल दिवस के अवसर पर देशभर में संथाल विद्रोह के अमर शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई. इस मौके पर केंद्र और राज्यों के कई प्रमुख नेताओं ने संथाल हूल के वीर सेनानियों के साहस, बलिदान और देशभक्ति को याद करते हुए उन्हें नमन किया. नेताओं ने कहा कि यह आंदोलन केवल अंग्रेजी शासन के खिलाफ विद्रोह नहीं था, बल्कि जनजातीय समाज के स्वाभिमान, अधिकारों और अस्तित्व की रक्षा के लिए लड़ी गई ऐतिहासिक लड़ाई थी, जिसने आगे चलकर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर हूल दिवस के अवसर पर संदेश साझा करते हुए संथाल क्रांति के सभी अमर बलिदानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की. उन्होंने कहा कि जनजातीय अस्मिता और मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सब कुछ न्योछावर करने वाले इन वीरों का देश हमेशा ऋणी रहेगा.
अमित शाह ने विशेष रूप से सिदो-कान्हू मुर्मु, चांद-भैरव और वीरांगनाओं फूलो-झानो का उल्लेख करते हुए कहा कि इन महान सेनानियों ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष की ऐसी शुरुआत की, जिसने देशभर में आजादी की चेतना को मजबूत किया. उनके अनुसार संथाल हूल भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक अध्याय है.
जल, जंगल और जमीन की रक्षा का ऐतिहासिक संघर्ष- ओम बिरला
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी हूल दिवस पर अपने संदेश में संथाल विद्रोह के हजारों वीर आदिवासी स्त्री-पुरुषों को श्रद्धांजलि दी. उन्होंने कहा कि सिदो और कान्हू के नेतृत्व में शुरू हुआ यह आंदोलन औपनिवेशिक शासन, शोषण और अन्याय के खिलाफ जनआक्रोश का प्रतीक था.
उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन के अधिकारों के साथ-साथ स्वाभिमान और अस्तित्व की रक्षा के लिए लड़ा गया यह जनआंदोलन आने वाले वर्षों में कई स्वतंत्रता आंदोलनों की प्रेरणा बना. ओम बिरला ने कहा कि इन अमर शहीदों का त्याग और राष्ट्रप्रेम हमेशा देशवासियों को अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की प्रेरणा देता रहेगा.
शिवराज सिंह चौहान ने याद किया जनजातीय समाज का साहस
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी हूल दिवस पर संथाल विद्रोह के सभी वीर-वीरांगनाओं को नमन किया. उन्होंने कहा कि सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानो जैसे महान योद्धाओं ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष का बिगुल फूंका और जनजातीय समाज को अन्याय के विरुद्ध डटकर खड़े होने का संदेश दिया.
उन्होंने अपने संदेश में कहा कि “अंग्रेजों हमारी माटी छोड़ो” जैसे नारों के साथ शुरू हुआ यह आंदोलन आने वाली पीढ़ियों को देशप्रेम, साहस और आत्मसम्मान की सीख देता रहेगा.
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बलिदान को किया नमन
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी हूल दिवस पर अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की. उन्होंने कहा कि संथाल विद्रोह जनजातीय वीरता, स्वाभिमान और स्वतंत्रता की भावना का प्रतीक है. दमनकारी शासन के खिलाफ इस संघर्ष ने पूरे देश में आजादी की नई चेतना जगाई.
उन्होंने कहा कि इन वीर सपूतों के बलिदान को देश कभी भुला नहीं सकता और उनका योगदान हमेशा सम्मान के साथ याद किया जाएगा.
हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया प्रेरणा का स्रोत
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी सिदो-कान्हू सहित संथाल हूल के सभी वीर सेनानियों को श्रद्धांजलि दी. उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए लड़ा गया उनका संघर्ष भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में हमेशा विशेष स्थान रखेगा.
मुख्यमंत्री ने कहा कि अन्याय और शोषण के खिलाफ जिस साहस और दृढ़ संकल्प के साथ इन वीरों ने संघर्ष किया, वह आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है. उनका त्याग और बलिदान आने वाली पीढ़ियों को अपने अधिकारों, सम्मान और मातृभूमि की रक्षा के लिए सदैव प्रेरित करता रहेगा.
भारत एक्सप्रेस
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