यमुना नदी के प्रदूषण के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा लिए गए स्वतः संज्ञान पर सुनवाई के दौरान कहा कि अब दिल्ली में सरकार बदलने से सभी विवाद सुलझ सकते है. कोर्ट ने कहा कि बदली हुई परिस्थितियों में बेहतर कार्यान्वयन संभव हो सकता है. कोर्ट ने कहा कि पहले एनजीटी यमुना की पानी की गुणवत्ता से संबंधित मुद्दों की निगरानी कर रहा था और समय-समय पर आदेश दे रहा था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वतः संज्ञान लेने के बाद एनजीटी ने निगरानी बंद कर अपनी समितियों को भंग कर दिया था.
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से पूछा कि यमुना नदी से संबंधित अन्य मुद्दे किसी अन्य पीठ के पास लंबित है क्या? कोर्ट ने यह भी पूछा क्या उन सभी को सुप्रीम कोर्ट द्वारा क्लब कर सुना जाए या एनजीटी को ट्रांसफर कर दिया जाए. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने हरियाणा और दिल्ली सरकार से यमुना नदी के प्रदूषण पर अपनी स्टेट्स रिपोर्ट अदालत में पेश करने का निर्देश दिया था.
सुप्रीम कोर्ट ने नदियों के प्रदूषण का लिया संज्ञान
प्रदूषित नदियों का निवारण शीर्षक से एक स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा था कि यमुना के प्रदूषण के साथ-साथ तटीय क्षेत्रों और उपचारात्मक उपायों से संबंधित मामले समक्ष है. 13 जनवरी 2021 को सुप्रीम कोर्ट ने यमुना और गंगा नदियों के प्रदूषण का संज्ञान लिया था और कहा था कि प्रदूषण मुक्त जल संवैधानिक ढांचे के तहत मूल अधिकार है और एक कल्याणकारी राज्य इसे सुनिश्चित करने के लिए बाध्य है.
दरअसल दिल्ली जल बोर्ड ने एक याचिका दायर कर यह शिकायत की थी कि हरियाणा में उद्योगों से निकला जहरीला पानी नदी में छोड़ा जा रहा है. इससे पानी में अमोनिया का स्तर बहुत बढ़ गया है. यमुना के जल में अमोनिया का.स्तर बढ़ने पर दिल्ली जल बोर्ड आमतौर पर जलापूर्ति रोक देता है.
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

