भारत में अल्पसंख्यक शिक्षा के ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित एक उच्च-स्तरीय बैठक में, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थान आयोग (NCMEI) के कार्यकारी अध्यक्ष प्रोफेसर (डॉ.) शाहिद अख़्तर ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान के साथ विस्तृत विचार-विमर्श किया. शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे.
इस बैठक को “अत्यधिक उत्पादक और सकारात्मक” बताया गया, जिसका केंद्रबिंदु देश भर में अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थानों का सशक्तिकरण, स्थिरता और समग्र विकास था. प्रोफेसर अख़्तर ने राष्ट्रीय ताने-बाने में इनकी अनिवार्य भूमिका पर बल दिया. उन्होंने कहा, “इन संस्थानों के योगदान पर चर्चा ने समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने, सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने और सभी वर्गों को समान अवसर प्रदान करने में उनकी भूमिका को गहराई से उजागर किया.” उन्होंने इस कार्य को “एक शिक्षित, कुशल और सामंजस्यपूर्ण समाज” के निर्माण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया.
सशक्तिकरण और समावेशन पर संवाद
चर्चा का एजेंडा प्रशासनिक कार्यप्रणाली से आगे बढ़कर अल्पसंख्यक शिक्षा के मूल दर्शन तक विस्तृत था. प्रोफेसर अख़्तर ने एक ऐसे विजन को रेखांकित किया जहां ये संस्थान केवल अलग-थलग इकाइयां नहीं, बल्कि राष्ट्रीय प्रगति के सक्रिय योगदानकर्ता हैं. वार्ता ने इस बात को पुनः पुष्ट किया कि इन संस्थानों का उत्थान देश के व्यापक शैक्षिक एवं सामाजिक लक्ष्यों से सहज रूप से जुड़ा हुआ है.
इस भावना का समर्थन करते हुए, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थानों का समर्थन करने के भारत सरकार के दृढ़ संकल्प की पुष्टि की. उन्होंने इन संस्थानों द्वारा प्रदान की जाने वाली शिक्षा की गुणवत्ता, पहुंच और शासन को बढ़ाने के लिए निरंतर संवाद, नीतिगत सहयोग और संस्थागत सुधारों के महत्व पर जोर दिया.
सहयोगात्मक ढांचे को मजबूती
प्रोफेसर अख़्तर ने मंत्री का स्वागत किया और सरकार के मार्गदर्शन एवं निरंतर समर्थन के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया. उन्होंने एनसीएमईआई के अधिदेश को दोहराते हुए कहा, “हम अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थानों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करने और शैक्षिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए शिक्षा मंत्रालय और सभी संबंधित हितधारकों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं.”
बैठक का समापन इस साझा संकल्प के साथ हुआ कि अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थानों को भारत के समावेशी विकास और शैक्षिक उन्नति के मजबूत एवं प्रभावी स्तंभों के रूप में और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा. यह उच्च-स्तरीय संवाद जमीनी चुनौतियों के समाधान और देश की भावी मानव पूंजी के निर्माण में इन संस्थानों की क्षमता का दोहन करने के लिए एक समन्वित प्रयास का संकेत देता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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