India Bangladesh Border: कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार को एक अहम फैसला सुनाते हुए पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देश दिया है कि वह नौ सीमावर्ती जिलों में अधिग्रहित जमीन को 31 मार्च तक सीमा सुरक्षा बल (BSF) को सौंप दे. अदालत ने कहा कि यह कदम जरूरी है ताकि भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़बंदी का अधूरा काम पूरा किया जा सके और सुरक्षा मजबूत हो.
क्यों है मामला गंभीर?
भारत-बांग्लादेश सीमा कुल 4,096 किलोमीटर लंबी है, जिसमें से 2,216 किलोमीटर से ज्यादा हिस्सा पश्चिम बंगाल से जुड़ा हुआ है. 2016 से कई कैबिनेट मंजूरियों और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद भी सीमा का बड़ा हिस्सा अब भी बिना बाड़ का है. अदालत ने कहा कि इससे घुसपैठ, तस्करी, नकली नोट और नशीले पदार्थों से जुड़े अपराधों का खतरा बढ़ जाता है. कोर्ट ने साफ किया कि केंद्र सरकार के फंड से अधिग्रहित जमीन को सौंपने में देरी का कोई तर्कसंगत कारण नहीं है.
‘सुरक्षा सर्वोच्च है और इस पर कोई समझौता नहीं’
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनावी प्रक्रिया या वोटर लिस्ट संशोधन जैसे प्रशासनिक कारण राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में देरी का आधार नहीं हो सकते. अदालत ने कहा कि सुरक्षा सर्वोच्च है और इस पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता.
अदालत तक मामला कैसे पहुंचा?
यह मामला एक पूर्व सेना अधिकारी द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) से शुरू हुआ. याचिकाकर्ता ने दावा किया कि राज्य सरकार द्वारा जमीन BSF को न सौंपने के कारण सीमा पर बाड़बंदी का काम रुक गया है और इससे सुरक्षा जोखिम बढ़ रहे हैं. सुनवाई के दौरान अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि जब भूमि अधिग्रहण पर मुआवजा पहले ही दिया जा चुका है तो जमीन का हस्तांतरण रोकना अनुचित है.
BJP सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने क्या कहा?
हाईकोर्ट के आदेश पर BJP सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने इस फैसले को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से सही और सराहनीय बताया. त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार घुसपैठियों को खुश करने की राजनीति कर रही है, जिससे सुरक्षा खतरे में पड़ रही है. उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता भविष्य में ऐसा शासन वापस नहीं आने देगी जो राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता करे.
ये भी पढ़ें-गणतंत्र दिवस 2026 पर सम्मानित अर्हान बगाती, सामाजिक सुधार से लेकर वैश्विक मंचों तक सक्रिय भूमिका
आगे की प्रक्रिया
हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से यह भी पूछा है कि क्या भूमि अधिग्रहण को ‘आपातकालीन प्रावधान’ के तहत और तेजी से पूरा किया जा सकता है. अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 2 अप्रैल 2026 को तय की है.
Also Follow Bharat Express on Youtube
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.



