Indian Citizenship Proof
Indian Citizenship Proof: विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा पासपोर्ट सेवा दिवस के अवसर पर दिए गए इस बयान कि “भारतीय पासपोर्ट एक यात्रा दस्तावेज है, नागरिकता का प्रमाण नहीं”, के बाद देशभर में नागरिकता के प्रमाण को लेकर नई बहस शुरू हो गई है. इसके बाद लोग सवाल उठा रहे हैं कि यदि पासपोर्ट, आधार कार्ड, वोटर आईडी, पैन कार्ड और राशन कार्ड नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं हैं, तो फिर भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए कौन-सा दस्तावेज मान्य है.
दरअसल, भारतीय कानून के अनुसार आधार कार्ड का उद्देश्य केवल किसी व्यक्ति की पहचान स्थापित करना है, न कि उसकी नागरिकता. सुप्रीम कोर्ट भी अपने कई फैसलों में स्पष्ट कर चुका है कि आधार नागरिकता का प्रमाण नहीं है. इसी तरह वोटर आईडी मतदान का अधिकार दर्शाती है, जबकि राशन कार्ड और पैन कार्ड क्रमशः सार्वजनिक वितरण प्रणाली और कर संबंधी पहचान के लिए जारी किए जाते हैं. हालांकि, पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं होने के बयान से जो चर्चा छिड़ी है उसका रास्ता NRC की तरफ जाता है (What is Indian Citizenship Proof). आइए जानते हैं.
2003 में शुरू हुई कवायद
पासपोर्ट पर दिए गए बयान के बाद चर्चा एक बार फिर नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स NRC (National Register of Citizens) की ओर मुड़ गई है. वर्ष 2003 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने नागरिकता कानून में संशोधन कर राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर तैयार करने का प्रावधान किया था. इसके तहत देश के सभी नागरिकों का पंजीकरण और राष्ट्रीय पहचान रजिस्टर तैयार करने की व्यवस्था की गई.
बाद में 2011 में तत्कालीन गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया. इसी दौरान आधार परियोजना को भी प्राथमिकता मिली और बड़े पैमाने पर आधार कार्ड बनाए गए. हालांकि आधार के व्यापक उपयोग के बावजूद इसकी कानूनी स्थिति नागरिकता के प्रमाण के रूप में स्थापित नहीं हुई.
NRC से होगी भारत की नागरिक की पहचान
साल 2019 में केंद्र की NDA सरकार ने देशव्यापी NRC लागू करने की मंशा जताई थी. इस घोषणा के बाद कई राज्यों में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए, जिसके चलते यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी.
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वहीं, असम में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में तैयार किए गए NRC की अंतिम सूची से लगभग 19 लाख लोगों के नाम बाहर रह गए थे. इनमें विभिन्न समुदायों के लोग शामिल थे, जो आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके. इस घटना ने नागरिकता से जुड़े दस्तावेजों और प्रमाणों पर गंभीर सवाल खड़े किए थे. अब पासपोर्ट को लेकर आए ताजा बयान के बाद नागरिकता की पहचान, दस्तावेजों की वैधता और NRC जैसे मुद्दे एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में आ गए हैं. हालांकि सरकार की ओर से देशव्यापी NRC को लेकर फिलहाल कोई नई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है.
-भारत एक्सप्रेस
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