Indian Railways: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने गुजरात के लिए एक ऐतिहासिक रेलवे परियोजना को मंजूरी दी है. केंद्र सरकार ने अहमदाबाद (सरखेज)-धोलेरा सेमी हाई-स्पीड डबल लाइन रेलवे कॉरिडोर को हरी झंडी दे दी है. करीब 20,667 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना भारत की पहली स्वदेशी तकनीक आधारित सेमी हाई-स्पीड रेल परियोजना होगी.
सबसे खास बात यह है कि दुनिया में पहली बार कोई सेमी हाई-स्पीड ट्रेन ब्रॉड गेज ट्रैक पर 220 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ेगी. अब तक दुनिया के अधिकांश हाई-स्पीड और सेमी हाई-स्पीड रेल नेटवर्क स्टैंडर्ड गेज ट्रैक पर ही चलते रहे हैं.
134 किलोमीटर लंबा होगा कॉरिडोर
यह रेल कॉरिडोर लगभग 134 किलोमीटर लंबा होगा. परियोजना अहमदाबाद को धोलेरा स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन, आगामी धोलेरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और लोथल स्थित राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर से जोड़ेगी. रेलवे अधिकारियों के अनुसार इस कॉरिडोर पर ट्रेनों की डिजाइन स्पीड 220 किमी प्रति घंटा रखी गई है, जबकि परिचालन गति 200 किमी प्रति घंटा होगी. कॉरिडोर पर कुल 13 आधुनिक स्टेशन बनाए जाएंगे.
48 मिनट में पूरा होगा आपका सफर
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इस परियोजना के पूरा होने के बाद अहमदाबाद और धोलेरा के बीच यात्रा समय काफी कम हो जाएगा. अभी सड़क मार्ग से कई घंटे लगते हैं, लेकिन नई रेल लाइन बनने के बाद यह सफर करीब 48 मिनट में पूरा किया जा सकेगा. कुछ रिपोर्ट्स में इसे 34 से 48 मिनट के बीच बताया गया है.
सरकार का मानना है कि इससे दैनिक यात्रियों, उद्योगों और व्यापारिक गतिविधियों को बड़ा फायदा मिलेगा. लोग एक ही दिन में आना-जाना आसानी से कर सकेंगे.
पूरी तरह मेक इन इंडिया तकनीक
यह परियोजना आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत विकसित की जा रही है. रेलवे मंत्रालय के अनुसार ट्रेन और रेल नेटवर्क में इस्तेमाल होने वाली अधिकांश तकनीक स्वदेशी होगी. इस कॉरिडोर पर भविष्य में नमो भारत ट्रेनें चलाने की योजना है. ट्रेनों में आधुनिक कवच 5.0 सुरक्षा प्रणाली लगाई जाएगी, जिससे ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन और सुरक्षा स्तर काफी मजबूत होगा. विशेषज्ञों का कहना है कि यह परियोजना भविष्य में देशभर में सेमी हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के विस्तार का मॉडल बन सकती है.
बड़े पैमाने पर होगा निर्माण कार्य
परियोजना के तहत 3 मेगा पुल, 74 किलोमीटर लंबा वायाडक्ट, 39 रोड अंडर ब्रिज और 2 रेल ओवर रेल ब्रिज बनाए जाएंगे. कुल ट्रैक लंबाई लगभग 293 किलोमीटर होगी.
सरकार ने इस परियोजना को अगले चार वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा है. कुछ आधिकारिक दस्तावेजों में इसे 2030-31 तक पूरा करने की बात भी कही गई है.
मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट हब गुजरात
गुजरात सरकार के मुख्य सचिव मनोज कुमार दास ने कहा कि यह परियोजना राज्य के औद्योगिक विकास को नई रफ्तार देगी. कॉरिडोर का कनेक्शन साबरमती, धोलेरा एयरपोर्ट, लोथल और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से होगा.
साबरमती, गांधीग्राम और वस्त्रापुर स्टेशनों पर मेट्रो कनेक्टिविटी भी मिलेगी. वहीं साबरमती स्टेशन पर मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना से जुड़ाव होगा. सरकार का लक्ष्य गुजरात को विश्वस्तरीय मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट हब बनाना है.
5 लाख लोगों को मिलेगा फायदा
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक इस परियोजना से लगभग 284 गांवों और 5 लाख से ज्यादा लोगों को सीधा लाभ मिलेगा. इसके अलावा हर साल लगभग 20 लाख टन अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता विकसित होगी. लॉजिस्टिक लागत में करीब 54 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान है.
निर्माण चरण में लगभग 91 लाख मानव-दिवस रोजगार पैदा होंगे. साथ ही हर साल करीब 0.48 करोड़ लीटर ईंधन की बचत और लगभग 2 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी. यह लगभग 10 लाख पेड़ लगाने के बराबर माना जा रहा है.
पीएम गति शक्ति योजना का हिस्सा
यह परियोजना प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत विकसित की जा रही है. इसका मकसद देश में मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी को मजबूत करना और लॉजिस्टिक नेटवर्क को आधुनिक बनाना है. रेल मंत्रालय का कहना है कि अहमदाबाद-धोलेरा कॉरिडोर केवल एक रेलवे परियोजना नहीं, बल्कि भारत के रेलवे आधुनिकीकरण, हरित परिवहन और तेज आर्थिक विकास की दिशा में बड़ा कदम है.
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