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‘सत्यशोधक समाज के न्याय और समानता के विचार…ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती पर अमित शाह का नमन

महान समाज सुधारक Jyotiba Phule की 200वीं जयंती पर देशभर में कार्यक्रम आयोजित किए गए. गृह मंत्री Amit Shah ने उन्हें ‘क्रांतिसूर्य’ बताते हुए नारी शिक्षा और समानता के लिए उनके योगदान को याद किया…

महान समाज सुधारक, विचारक और नारी शिक्षा के प्रबल समर्थक महात्मा ज्योतिबा फुले की आज 200वीं जयंती पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाई जा रही है. इस ऐतिहासिक अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ज्योतिबा फुले को याद करते हुए उन्हें ‘क्रांतिसूर्य’ और महान शिक्षाविद् बताया.

अमित शाह ने कहा कि फुले का जीवन सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध एक सतत संघर्ष था, जिसने भारत की चेतना को नई दिशा देने का काम किया. गृह मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि आज का नया भारत उन्हीं के दिखाए गए समानता और मानवाधिकारों के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है.

 

शाह ने याद किया फुले का संघर्ष

अमित शाह ने अपने संदेश में कहा कि महात्मा ज्योतिबा फुले केवल एक विचारक नहीं थे, बल्कि वे शिक्षा को समाज सुधार का सबसे प्रभावी माध्यम मानते थे. उन्होंने उस दौर में महिलाओं की शिक्षा के लिए अभूतपूर्व कार्य किए जब समाज में इसके प्रति भारी विरोध था. शाह के अनुसार, फुले का मानना था कि बिना शिक्षा के किसी भी वर्ग का उत्थान संभव नहीं है और इसी सोच ने दलितों, वंचितों और शोषितों के लिए बंद पड़े अवसरों के द्वार खोल दिए.

‘सत्यशोधक समाज’ और न्याय की स्थापना’

गृह मंत्री ने ज्योतिबा फुले द्वारा स्थापित ‘सत्यशोधक समाज’ के महत्त्व को रेखांकित करते हुए कहा कि इस संस्था ने समाज में व्याप्त भेदभाव और जातिगत असमानताओं के खिलाफ एक व्यापक सामाजिक जागरण की शुरुआत की थी. शाह ने कहा कि फुले की परिकल्पना एक ऐसे समाज की थी जहाँ हर व्यक्ति को मानवीय गरिमा के साथ जीने का हक हो. आज केंद्र सरकार की कई योजनाएं समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को न्याय दिलाने के इसी संकल्प को दोहराती हैं.

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‘फुले के सपनों को मिल रही नई उड़ान’

अमित शाह ने विशेष रूप से नारी शिक्षा के क्षेत्र में सावित्रीबाई फुले और ज्योतिबा फुले के योगदान को नमन किया. उन्होंने कहा कि आज जब भारत की बेटियां हर क्षेत्र में नेतृत्व कर रही हैं, तो इसके पीछे ज्योतिबा फुले जैसे महापुरुषों की दूरदर्शिता है. शाह के मुताबिक, महिलाओं को सशक्त बनाना और उन्हें बराबरी का हक देना ही महात्मा फुले के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है, जिसके लिए वर्तमान सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है.

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-भारत एक्सप्रेस



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