Kerala Congress leadership decision: केरल में कांग्रेस विधायक दल के नेता के चयन को लेकर लंबे समय तक असमंजस बना रहा. कई विधायकों का झुकाव केसी वेणुगोपाल की ओर था और यह बात पार्टी के भीतर भी चर्चा में रही लेकिन अंतिम फैसला वी डी सतीशन के पक्ष में आया.
सोनिया गांधी का फोन कॉल
जब स्थिति पूरी तरह उलझ गई तो सोनिया गांधी ने हस्तक्षेप किया. उन्होंने वरिष्ठ नेता ए के ऐंटनी से फोन पर राय ली. ऐंटनी ने वेणुगोपाल के नाम पर राजनीतिक जोखिम का हवाला देते हुए पुनर्विचार की सलाह दी. यही बातचीत पूरे समीकरण को बदल गई.
वेणुगोपाल के खिलाफ तर्क
ऐंटनी ने कहा कि वेणुगोपाल सांसद हैं, उन्हें मुख्यमंत्री बनाने पर विधानसभा सीट खाली होगी और उपचुनाव कराने पड़ेंगे. हालिया चुनाव के बाद उपचुनाव पार्टी के लिए खतरा साबित हो सकते हैं. इस वजह से उनका नाम आगे बढ़ाना सही नहीं होगा.
सतीशन के पक्ष में मजबूती
ऐंटनी ने यह भी बताया कि जनता का समर्थन वी डी सतीशन के पक्ष में ज्यादा साफ है. सहयोगी दल भी उन्हें स्वीकार कर रहे हैं. दिल्ली से नाम थोपने का संदेश नहीं जाना चाहिए. इन कारणों से सतीशन को आगे बढ़ाना बेहतर विकल्प माना गया.
राहुल और प्रियंका की भूमिका
फैसला होने के बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने वेणुगोपाल से बातचीत की और उन्हें केंद्र में ही जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार किया. इसके बाद पर्यवेक्षक केरल भेजे गए और औपचारिक रूप से सतीशन को विधायक दल का नेता चुना गया.
ऐंटनी फैक्टर
ए के ऐंटनी लंबे समय से सोनिया गांधी के भरोसेमंद सलाहकार रहे हैं. उनकी सादगी और संतुलित दृष्टिकोण ने इस फैसले को दिशा दी. केरल की राजनीति में उनका प्रभाव एक बार फिर निर्णायक साबित हुआ.
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-भारत एक्सप्रेस
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