Ava Pani Jhoki campaign: कोरिया जिले में जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए प्रशासन ने “आवा पानी झोंकी” नाम से अभियान शुरू किया था. इस पहल को लेकर पंचायतों में दीवारों पर नारे लिखे गए और जागरूकता फैलाने के दावे किए गए. लेकिन जब जमीनी हालात देखे जाते हैं तो तस्वीर कुछ और ही नजर आती है. जिले में बने कई स्टॉपडेमों पर पानी रोकने की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है. बारिश खत्म हुए महीनों गुजर चुके हैं फिर भी कई जगहों पर गेट खुले पड़े हैं और पानी लगातार बह रहा है.
किसानों की बढ़ी मुश्किलें
बैकुंठपुर जनपद की आदर्श ग्राम पंचायत मुरमा इसका बड़ा उदाहरण है. यहां आधा दर्जन से ज्यादा स्टॉपडेम बनाए गए हैं लेकिन इनमें से कई में गेट ही नहीं लगाए गए. अगर समय रहते गेट की व्यवस्था की जाती तो आसपास के किसानों को रबी की फसल के लिए पर्याप्त पानी मिल सकता था. पानी यूं ही बह जाने से न केवल सरकारी योजनाओं की उपयोगिता पर सवाल उठ रहे हैं बल्कि किसानों की उम्मीदें भी टूटती दिख रही हैं.
जल संरक्षण की असली जरूरत
सबसे अहम मुद्दा यह है कि प्रशासन ने जल संरक्षण की असली जरूरत पर ध्यान नहीं दिया. प्रचार-प्रसार और दीवारों पर लिखे संदेशों से ज्यादा जरूरी था कि स्टॉपडेमों को तकनीकी रूप से मजबूत किया जाता ताकि पानी को लंबे समय तक सहेजा जा सके.
ये भी पढ़ें-विक्रोली टैगोर नगर में दिल दहला देने वाला हादसा, 26 जनवरी के मौके पर स्पीकर गिरने से 3 साल की बच्ची की मौत
अब बड़ा सवाल यही है कि क्या जिला प्रशासन इस वास्तविक समस्या की ओर ध्यान देगा या फिर जल संरक्षण का यह अभियान केवल नारों और कागजी कामों तक ही सीमित रह जाएगा. किसानों और ग्रामीणों की नजरें अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं.
Also Follow Bharat Express on Youtube
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.





