भारत सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही (H1) के लिए अपनी उधारी योजना को अंतिम रूप दे दिया है. इस वित्तीय वर्ष के लिए ₹14.82 लाख करोड़ के सकल बाजार उधारी में से ₹8.00 लाख करोड़ (54.0%) एच1 में दिनांकित प्रतिभूतियों के जारी करने के माध्यम से उधार लिया जाएगा. इसमें ₹10,000 करोड़ के सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड (एसजीआरबी) भी शामिल हैं.
इस उधारी को 26 साप्ताहिक नीलामियों के जरिए पूरा किया जाएगा, जो विभिन्न परिपक्वताओं में वितरित होगा. इनमें 3-वर्ष (5.3%), 5-वर्ष (11.3%), 7-वर्ष (8.2%), 10-वर्ष (26.2%), 15-वर्ष (14.0%), 30-वर्ष (10.5%), 40-वर्ष (14.0%) और 50-वर्ष (10.5%) की प्रतिभूतियां शामिल होंगी.
सरकार अपनी उधारी प्रोफाइल को सरल बनाने के लिए प्रतिभूतियों की स्विचिंग और बायबैक भी करेगी. साथ ही, नीलामी अधिसूचनाओं में दर्शाए गए प्रत्येक प्रतिभूति के लिए ₹2,000 करोड़ तक अतिरिक्त सदस्यता बनाए रखने के लिए ग्रीनशू विकल्प का प्रयोग करने का अधिकार सरकार के पास रहेगा.
पहली तिमाही (क्यू1) के दौरान, सरकारी खजाने के बिलों के माध्यम से साप्ताहिक उधारी ₹19,000 करोड़ तक होने का अनुमान है. इसमें 91 दिन के टी-बिल के तहत ₹9,000 करोड़, 182 दिन के टी-बिल के तहत ₹5,000 करोड़ और 364 दिन के टी-बिल के तहत ₹5,000 करोड़ जारी किए जाएंगे.
सरकार के खातों में अस्थायी विसंगतियों से निपटने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही के लिए वेज एंड मीन एडवांस (डब्ल्यूएमए) की सीमा ₹1.50 लाख करोड़ तय की है.
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